पूर्व ग्राम प्रधान से अभद्रता के मामले में 10 दोषियों को पांच-पांच साल की सजा
चम्पावत, 20 अगस्त (हि.स.)। बनबसा क्षेत्र के गुदमी गांव में पूर्व ग्राम प्रधान विनीता राना के साथ अभद्रता, जातिसूचक टिप्पणी और सार्वजनिक अपमान के मामले में विशेष सत्र न्यायालय (एससी/एसटी) ने 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर 37-37 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जुलाई 2024 में आपदा के दौरान राहत सामग्री वितरण के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान विनीता राना को प्रशासन की ओर से गुदमी बुलाया गया था। 10 जुलाई को गांव पहुंचने पर कुछ लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। आरोप है कि इस दौरान जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के साथ उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर अपमानित किया गया।
पीड़िता की तहरीर पर 11 जुलाई 2024 को बनबसा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य प्रमाणों के आधार पर विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी) एवं जिला जज अनुज कुमार संगल ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।
दोषियों में हेमा खड़ायत, लीला दिगारी, जानकी कलौनी, दिनेश कलौनी, रोहित जेम्स, पिंकी जेम्स उर्फ सारिका, निखिल जेम्स उर्फ अमन, संजीव सिंह, निर्मला दिगारी और संदीप लॉरेंस शामिल हैं। सभी गुदमी, बनबसा के निवासी हैं।
अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों से वसूले जाने वाले अर्थदंड में से एक लाख रुपये पीड़िता विनीता राना को दिए जाएंगे। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से भी एक लाख रुपये की प्रतिकर राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चम्पावत को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी

