कैबिनेट बैठक में वन, मदरसा, कुंभ और परिवहन से जुड़े कई अहम फैसलाें काे मिली मंजूरी

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कैबिनेट बैठक में वन, मदरसा, कुंभ और परिवहन से जुड़े कई अहम फैसलाें काे मिली मंजूरी


देहरादून, 30 अप्रैल (हि. स.)। धामी मंत्रिमंडल की बैठक में वन सीमा क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए मधुमक्खी पालन नीति, शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव को लेकर मदरसों की मान्यता प्रक्रिया पुनर्गठित करने, परिवहन विभाग सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

गुरुवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक के बाद सचिव शैलेश बगोली ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर मेंं ब्रीफिंग की। उन्हाेंने बताया कि मंत्रिमंडल ने वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई नीति को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर मानव-हाथी टकराव को कम करना है। सरकार का मानना है कि मधुमक्खी आधारित गतिविधियां वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्थायी आजीविका का विकल्प प्रदान करेंगी।

उन्हाेंने बताया कि आजीविका एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026' के तहत मधुमक्खी पालन को सुनियोजित तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक अवरोध तैयार होगा और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की संभावना है। इस संबंध में कृषि, उद्यान सहित संबंधित विभाग की ओर से पारूप तैयार किया जाएगा। उन्हाेंने बताया कि वन, कृषि और उद्यान विभागों के समन्वय से एक व्यापक रूपरेखा बनाई जाएगी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर गांवों के किनारे स्थित संस्थानों के उपयोग और विकास को लेकर भी नीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा और स्थानीय संसाधनों के बेहतर समन्वय को सुनिश्चित किया जा सके।

सचिव बगाेली ने बताया कि कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मदरसों की मान्यता प्रक्रिया में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत कक्षा 1 से 8 तक संचालित 452 मदरसों की मान्यता अब जिला स्तर से दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने की कोशिश की गई है। प्रारंभिक समीक्षा में करीब 30 ऐसे मदरसे चिन्हित किए गए हैं, जो वर्तमान में संचालित नहीं हो रहे हैं। इन संस्थानों की स्थिति स्पष्ट करने और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि कक्षा 9 से 12 तक के करीब 52 मदरसों को अब राज्य शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। इस फैसले का उद्देश्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

सचिव बगाेली ने पत्रकाराें काे बताया कि बैठक में कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर अहम निर्णय लिया गया, जिसके तहत 1 करोड़ रुपये तक के कार्य मेला अधिकारी, 5 करोड़ रुपये तक गढ़वाल आयुक्त और इससे अधिक लागत वाले कार्य शासन स्तर से स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही साथ ही परिवहन विभाग को बसों की खरीद की स्वीकृति दी गई है, जबकि जीएसटी दर में कमी के चलते अब 100 की बजाय 109 बसें खरीदी जा सकेंगी। उद्योग विभाग में दर 7 रुपये प्रति कुंतल से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंतल कर दी गई है और आबकारी नीति के तहत 6 प्रतिशत दर को लागू करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में वन विभाग की भर्ती नियमावली में संशोधन करते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी की 18 से 25 वर्ष तय की गई। डी श्रेणी ठेकेदारों की कार्य सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अलावा विशेष शिक्षा शिक्षकों और शैक्षिक संवर्ग की नियमावली को मंजूरी, प्रतीक्षा सूची की वैधता एक वर्ष करने, लोक निर्माण विभाग में पद सृजन तथा मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ाने जैसे निर्णय भी लिए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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