दिवंगत कुलश्रेष्ठ सिंह रावत बने मानवता की मिसाल

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दिवंगत कुलश्रेष्ठ सिंह रावत बने मानवता की मिसाल


दधीचि देहदान समिति का 25वां देहदान और 53वां नेत्रदान

देहरादून, 24 मई (हि. स.)। दधीचि देहदान समिति ने अपने 25वें देहदान और 53वें नेत्रदान का सफल आयोजन कर समाज को मानव सेवा का प्रेरक संदेश दिया है। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) जैसे पावन समय में संपन्न हुआ यह दान कार्य लोगों के लिए संवेदनशीलता और परोपकार की मिसाल बन गया है।

देहरादून निवासी स्वर्गीय कुलश्रेष्ठ सिंह रावत ने जुलाई 2025 में समिति के माध्यम से नेत्र एवं देहदान का संकल्प लिया था। शनिवार को स्वांस संबंधी बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। उनके पुत्र सिद्धार्थ रावत, जो भारतीय वायुसेना में पायलट हैं, ने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए तुरंत समिति से संपर्क किया। समिति के प्रयासों से एसएमआई बैंक की टीम रावत परिवार के निवास पर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक कॉर्निया सुरक्षित किया। इसके बाद रविवार को दून मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में डॉ. राजेश मौर्य के निर्देशन में देहदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

इस दौरान समिति के कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार अरोड़ा सहित परिवार के कई सदस्य उपस्थित रहे। स्वर्गीय कुलश्रेष्ठ सिंह रावत उत्तराखंड परिवहन विभाग में असिस्टेंट रीजनल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त थे, जबकि उनकी पत्नी सुजाता रावत प्राथमिक शिक्षिका के पद से अवकाश प्राप्त हैं।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि नेत्रदान, अंगदान और देहदान जैसे निर्णय समाज में नई चेतना पैदा करते हैं। इससे जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिलने के साथ मेडिकल शिक्षा और शोध कार्यों को भी महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है।

समिति ने आमजन से भी नेत्रदान, अंगदान और देहदान के लिए आगे आने की अपील की है। इच्छुक व्यक्ति समिति के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर संकल्प पत्र भर सकते हैं। समिति के सदस्य घर पहुंचकर प्रक्रिया पूरी कराते हैं, जिसमें परिवार के दो सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है, ताकि मृत्युपरांत संकल्प सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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