केदार सभा काे 11 लाख का भुगतान करने पर सवालाें से घिरी बीकेटीसी

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केदार सभा काे 11 लाख का भुगतान करने पर सवालाें से घिरी बीकेटीसी


देहरादून, 06 मई (हि. स.)। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से सामने आए दस्तावेजों के आधार पर केदारनाथ में तीर्थ-पुरोहितों की संस्था 'केदार सभा' को 11 लाख रुपये के भुगतान काे लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बुधवार को कचहरी स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वर्ष 2025 में यह भुगतान नियमों को दरकिनार करने किया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्वीकृति ऐसे समय में दी गई जब केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष के खिलाफ विरोध जताया था। उन्हाेंने बताया कि आरटीआई में सामने आया कि 25 जुलाई से 01 अगस्त 2025 के बीच आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के लिए करीब ढाई महीने बाद 12 अक्टूबर 2025 को आनन-फानन में 11 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। नेगी के अनुसार, नोटशीट में कई खामियां हैं और सबसे अहम बात यह कि भुगतान प्रक्रिया में वित्त नियंत्रक की सहमति नहीं ली गई, जो वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।

नेगी का कहना है कि 10 अक्टूबर 2025 को केदार सभा के विरोध जताने के दो दिन बाद ही भुगतान स्वीकृत किया गया, जिससे सेटिंग और विरोध शांत कराने के लिए धन उपयोग की आशंका बनती है। इसके अलावा, कथा की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए एक निजी कंपनी को 1.5 लाख रुपये के भुगतान में भी कोटेशन प्रक्रिया को लेकर संदेह जताया गया है।

एक सवाल के जवाब में विकेश सिंह नेगी ने कहा जैसा कि अभी कुछ दिन पहले मीडिया व सोशल मीडिया से जानकारी मिली थी कि बीकेटीसी ने केदार सभा के अध्यक्ष समेत एक अन्य तीर्थ पुरोहित को विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया है। मंदिर समिति एक्ट में प्रावधान है कि विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त करने के लिए पहले शासन नियम बनाएगा। उसके पश्चात बीकेटीसी विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त कर सकती है। नियम विरुद्ध तरीके से सदस्यों की नियुक्ति कर दी। इन सदस्यों की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। प्रदेश सरकार को मामलों का संज्ञान लेना चाहिए।

अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि समिति में नियुक्तियों और वित्तीय प्रक्रियाओं में नियमों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी में कई मामलों में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है और सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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