तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर में दूसरे दिन भी गूंजा भागवत कथा का अमृत
हरिद्वार, 20 अगस्त (हि.स.)। कनखल स्थित श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर के 34वें श्रावण मास वार्षिकोत्सव महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भी मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और कथा व्यास आचार्य दीपक भाई जोशी के मुखारविंद से भागवत कथा का रसपान किया।
इस अवसर पर मंदिर के परमाध्यक्ष श्रीमहंत त्रिवेणी दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को धर्म, सत्य, सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का पवित्र अवसर है और इस दौरान भागवत कथा का श्रवण श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से विशेष फलदायी होता है। उन्होंने कहा कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि इसके संदेश को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है।
कथा व्यास आचार्य दीपक भाई जोशी ने दूसरे दिन श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का रसपान कराते हुए भक्ति और सत्संग की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध करती है और जीवन में सकारात्मक सोच एवं सद्भाव का संचार करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सत्य, धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि ईश्वर की भक्ति के साथ मानव सेवा भी भगवान की आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम है।
आचार्य दीपक भाई जोशी ने कहा कि आज के व्यस्त जीवन में मनुष्य को कुछ समय प्रभु के चिंतन, सत्संग और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के लिए अवश्य निकालना चाहिए। भागवत कथा के श्रवण से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
कथा के दौरान भजनों और भगवान के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण किया। कथा के समापन पर भगवान की मंगल आरती की गई और विश्व शांति, लोक कल्याण एवं सभी के सुख-समृद्धि की कामना की गई।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

