भवसागर से पार लगाने वाली वैतरणी है श्रीमद् भागवत कथा: स्वामी दामोदराचार्य
हरिद्वार, 05 अक्टूबर (हि.स.)। भूपतवाला स्थित आचार्य बेला इंडिया टेंपल में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं के साथ संत-महात्माओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली।
कथा के प्रथम दिन कथा व्यास युवराज स्वामी दामोदराचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भवसागर की वैतरणी है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर से मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को भी श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। कलियुग में भी भागवत कथा के प्रभाव के अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा का श्रवण करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण सनातन धर्म का महान ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह केवल कथा नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है।
जगद्गुरु रामानुजाचार्य आचार्य स्वामी श्याम नारायणाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मां गंगा की तरह ज्ञान की अविरल धारा है। इसे जितना ग्रहण किया जाता है, उतनी ही जिज्ञासा और आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होती है।
कथा के मुख्य यजमान उमाकांत पटसारिया, इंदौर ने कथा में पहुंचे संत-महापुरुषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर अनिल राजोरिया, नरेश चौहान, रामतीर्थ तिवारी, कल्पना पटसारिया, शिवम महंत, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत सुतीक्ष्ण मुनि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

