देवीधुरा में फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल,लाखों श्रद्धालु बने साक्षी

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देवीधुरा में फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल,लाखों श्रद्धालु बने साक्षी


देवीधुरा में फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल,लाखों श्रद्धालु बने साक्षी


-देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की घोषणा, 9.80 करोड़ से बनेगी मल्टीलेवल पार्किंग-देवीधुरा में 8 मिनट चली ऐतिहासिक बग्वाल, फलों-फूलों से खेला गया पाषाण युद्ध

चम्पावत, 28 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध मां वाराही धाम देवीधुरा में रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का आयोजन हुआ। चार खाम और सात थोक के बीच खेली गई पारंपरिक बग्वाल में इस बार फलों और फूलों का प्रयोग किया गया। मां वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल मैदान फलों और फूलों की बरसात से गूंज उठा। चार खामों के बीच दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई बग्वाल करीब आठ मिनट तक चली, जिसमें इस बार परंपरागत रूप से फलों और फूलों का प्रयोग किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनूठी ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने।

बग्वाल के दौरान पूरा मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंज उठा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बग्वालियों ने बांस और रिंगाल से बनी ढालों के साथ सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। शंखनाद और जयकारों के बीच शुरू हुई बग्वाल को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई बग्वाल 1:55 बजे समाप्त हुई।

दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई ऐतिहासिक बग्वाल 1:55 बजे समाप्त हुई। करीब आठ मिनट तक चले इस अनूठे आयोजन में फलों और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। उन्होंने ही चारों खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी निभाई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा पहुंचकर मां वाराही की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि देवीधुरा का बग्वाल मेला उत्तराखंड की आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और 4.57 करोड़ रुपये से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

धामी ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यहां 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण भी शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मेले की व्यवस्थाओं और गरिमा को और मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बग्वाल की यह अनोखी परंपरा देवीधुरा की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा कि बग्वाल के बाद सभी प्रतिभागी एक-दूसरे से गले मिलते हैं, जो अनुशासन और भाईचारे का संदेश देता है।

मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी की पूजा-अर्चना के बाद चार खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के बग्वालियों ने मैदान में प्रवेश किया। अलग-अलग रंगों की पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ियों में सजे बग्वालियों ने हाथों में ढालें थाम रखी थीं। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फलों और फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ एवं फलदायी माना जाता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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