अमेरिकन आश्रम की जमीन को लेकर विवाद गहराया, बाबा हठयोगी ने परमजीत पर लगाए गंभीर आरोप

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अमेरिकन आश्रम की जमीन को लेकर विवाद गहराया, बाबा हठयोगी ने परमजीत पर लगाए गंभीर आरोप


हरिद्वार, 13 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिकन आश्रम की संपत्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब स्वयं को ट्रस्ट का अध्यक्ष बताने वाले बाबा हठयोगी ने आश्रम की प्रबंधक परमजीत कौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बाबा हठयोगी ने स्वामी रामविशाल दास और अन्य संतों के साथ मीडिया से बातचीत में दावा किया कि आश्रम के नाम पर कथित रूप से फर्जी ट्रस्ट बनाकर संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।

बाबा हठयोगी ने आरोप लगाया कि कथित फर्जी ट्रस्ट में जमीन को खुर्द-बुर्द करने के आरोपी सोलंकी और परमजीत कौर के परिजनों को शामिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस ट्रस्ट की आड़ में आश्रम की जमीन बेची जा रही है। साथ ही, परमजीत कौर पर आश्रम परिसर में ही रेस्टोरेंट खोलने का आरोप भी लगाया।

बाबा हठयोगी और स्वामी रामविशाल दास ने आरोप लगाया कि आश्रम की तीन बीघा भूमि बिल्डर अजय कुमार को परमजीत कौर ने दी है। बाबा हठयोगी का दावा है कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की संपत्ति के संबंध में मनमाने फैसले लेकर निजी हित साधने की कोशिश की जा रही है, जिसे वह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।

अध्यक्ष बनाए जाने का दावा

बाबा हठयोगी ने कहा कि मैडम ईस्टर फ्रीड ने स्वयं आग्रह कर उन्हें ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया था, ताकि आश्रम की भूमि की रक्षा की जा सके। उन्होंने बताया कि वह ट्रस्ट के सचिव भी हैं और इसमें कुल सात सदस्य हैं। उनके मुताबिक, बहुमत के बिना ट्रस्ट में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने स्वयं को ट्रस्ट का अध्यक्ष बताते हुए संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने की बात कही।

सरकार में निहित कराने की भी चेतावनी

बाबा हठयोगी ने आरोप लगाया कि परमजीत कौर मैडम ईस्टर फ्रीड को भ्रमित कर मनमाने निर्णय ले रही हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के कथित प्रयासों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम की जमीन पर भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की नजर है। बाबा हठयोगी ने स्पष्ट कहा कि वह आश्रम की भूमि को निजी हितों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे। यदि इस संपत्ति का उपयोग सार्वजनिक हित में नहीं किया जाता है तो उसे सरकार में निहित कराने की मांग की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

Livevns.news Desk
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