औली :- स्नो मेकिंग सिस्टम निर्माण के दौरान भी भ्रष्टाचार को लेकर उठी थी आवाजें

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औली :- स्नो मेकिंग सिस्टम निर्माण के दौरान भी भ्रष्टाचार को लेकर उठी थी आवाजें


औली :- स्नो मेकिंग सिस्टम निर्माण के दौरान भी भ्रष्टाचार को लेकर उठी थी आवाजें


औली, 16 जनवरी (हि.स.)। सैफ गेम्स के लिए स्थापित कृतिम बर्फ बनाने के उपकरण का पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार व घोटालों की भेंट चढ़ गया, साऊथ एशियन विंटर गेम्स सैफ 2011के बाद तो सिस्टम ने काम ही नहीं किया लेकिन निर्माण के दौरान भी घटिया सामग्री के संदेह पर स्थानीय लोगों द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज भी उठाई थी जिसे हर स्तर पर अनसुना कर दिया गया, नतीजन आज बर्फ विहीन औली के वाशिंदे औली के प्रति उदासीन सिस्टम को लेकर बेहद आक्रोषित हैं।

विंटर डेस्टिनेशन औली जो सैकड़ो लोगों के रोजगार का एकमात्र जरिया है, पर्यटन के माध्यम से रोजगार की ओर कदम बढ़ा रहे युवा औली के प्रति सरकारों के उदासीन रवैये से खफा तो हैं ही भविष्य को लेकर भी बेहद चिंतत हैं। हिमक्रीड़ा केन्द्र औली को विश्व स्तरीय पहचान दिलाने के लिए वर्ष 2011 में साऊथ एशियन विंटर गेम्स का आयोजन किया गया और इससे पूर्व औली को अंतर्राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों के मानकों के अनुरूप सुसज्जित करने का प्रयास भी किया गया, कृतिम बर्फ बनाने की मशीन स्थापित की गई तथा आइस स्केटिंग रिंग का निर्माण भी किया गया,लेकिन कृतिम बर्फ बनाने का सिस्टम धरातल पर खरा नहीं उतर सका और करोड़ों रुपया बर्बाद हो गया।

ऐसा नहीं कि औली मे सैफ गेम्स से पूर्व हो रहे घटिया निर्माण को लेकर आवाजें न उठी हों, तब भी शिकायतों का दौर चला था, सैफ गेम्स से ठीक पहले तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय उत्तराखंड के तत्कालीन पर्यटन सचिव के साथ औली पहुंचे थे और कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मंडल ने उनसे भेंट कर औली मे हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत भी की लेकिन केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने व्यंगात्मक शब्दों के साथ शिकायत को ही ठंडे बस्ते मे डाल दिया।

इसके बाद भी औली के भ्रष्टाचार को लेकर स्थानीय लोग मुखर रहे और उत्तराखंड की राज्यपाल मार्गेट अल्वा शीतकालीन खेलों के उद्घाटन के लिए औली पहुंची तो विपक्ष एवं औली के प्रति जागरूक नागरिक भी भ्रष्टाचार की शिकायत का मन बनाकर औली पहुंचे लेकिन राज्यपाल ने अपने सम्बोधन मे ही पर्यटन सचिव के तारीफों के पुल बांधते हुए यह तक कह डाला कि उत्तराखंड के पर्यटन सचिव इतने योग्य व कर्मठ हैं कि सामने के पहाड़ पर भी स्कीइंग स्लोप तैयार कर देंगें इसके बाद तो शिकायत का मन बनाकर औली पहुंचे लोग निराश ही लौट गए, इन सब घटनाक्रमों से समझा जा सकता है कि औली मे हुए घोटालों को किस कदर दबाया जाता रहा।

औली के प्रति उपेक्षित रवैये का एक उदाहरण तब भी सामने आया जब सूबे के पर्यटन मंत्री ने औली मे निर्मित आइस स्केटिंग रिंग का लोकार्पण जीएमवीएन परिसर जोशीमठ मे ही कर दिया, जब राज्य के पर्यटन मंत्री ही लोकार्पण के लिए 12किमी की दूरी पर औली नहीं जा सके तो समझा जा सकता है कि औली के प्रति सरकार का कितना उदासीन रवैया है।

बहरहाल स्नो मेकिंग सिस्टम निर्माण के पंद्रह साल बाद ही सही औली को लेकर एक आंदोलन की शुरुवात हुई है तो निश्चित इसके परिणाम भी सामने आएंगे और उत्तराखंड मे हाल फिलहाल हुए आंदोलनो के बाद जाँच के आदेशों की तर्ज पर औली मे हुए घटिया निर्माण व घोटालों के भी जाँच के आदेश होंगें, ऐसी उम्मीद की ही जानी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रकाश कपरुवाण

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