बिरयानी शब्द के विरोध में उतरे हिंदूवादी संगठन, ठेलों पर चिपकाए वेज पुलाव के पोस्टर

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बिरयानी शब्द के विरोध में उतरे हिंदूवादी संगठन, ठेलों पर चिपकाए वेज पुलाव के पोस्टर


हरिद्वार, 06 जून (हि.स.)। धर्मनगरी हरिद्वार में बिरयानी शब्द के विरोध को लेकर हिंदूवादी संगठन सक्रिय हो गए हैं। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर वेज बिरयानी के नाम से संचालित ठेलों और दुकानों पर वेज पुलाव के पोस्टर चिपकाए तथा दुकानदारों से अपने बोर्डों पर नाम परिवर्तन करने की अपील की।

देवपुरा चौक और तुलसी चौक क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान का नेतृत्व अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने किया। इस दौरान जूना अखाड़े के संत स्वामी कार्तिक गिरी महाराज, कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री सहित कई संत और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से संवाद कर धार्मिक नगरी की मर्यादा तथा नगर निगम के बायलॉज के अनुरूप खाद्य पदार्थों के नाम प्रदर्शित करने का आग्रह किया।

पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि संगठन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वेज पुलाव को वेज बिरयानी के नाम से बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि बिरयानी शब्द मूल रूप से नॉनवेज व्यंजन से जुड़ा माना जाता है, जबकि हरिद्वार एक विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी है, जहां सामिष भोजन पर प्रतिबंध है। अतः धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी के व्यापार या रोजगार के विरोध में नहीं है, बल्कि केवल नामकरण को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है।

कथाव्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हरिद्वार सनातन संस्कृति और आस्था का प्रमुख केंद्र है, इसलिए यहां की परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप ही कार्य होना चाहिए। जूना अखाड़े के संत स्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को व्यापार करने का अधिकार है, लेकिन धार्मिक नगरी में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर संवेदनशीलता बरतना भी जरूरी है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से भी इस प्रकार की गतिविधियों पर नजर रखने और बायलॉज का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।

अभियान के दौरान भागवताचार्य पवन कृष्ण शास्त्री, आचार्य कमल मुनि महाराज, स्वामी चौतन्य महाराज, स्वामी राधा माधव, स्वामी श्याम गिरि, रोहित गिरि, ऋषि शर्मा, यशपाल शर्मा और कुलदीप शर्मा सहित अनेक संत एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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