ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर परमार्थ निकेतन में शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर परमार्थ निकेतन में शहीदों को दी श्रद्धांजलि


देहरादून, 07 मई (हि.स.)। ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार को स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की राष्ट्रीय चेतना, आत्मसम्मान और आतंकवाद के विरुद्ध अडिग संकल्प का ऐतिहासिक प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि एक वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला केवल कुछ निर्दोष लोगों पर नहीं था, बल्कि भारत की शांति, हमारी संस्कृति, मानवता और राष्ट्रीय अस्मिता पर किया गया कायराना प्रहार था। आतंकवादियों ने यह समझने की भूल की कि भारत की सहनशीलता उसकी कमजोरी है, लेकिन भारतीय सेना ने अपने साहस, अनुशासन और रणनीतिक क्षमता से यह स्पष्ट कर दिया कि नया भारत अन्याय और आतंक को सहन नहीं करता, बल्कि उसका दृढ़ और निर्णायक उत्तर देता है।

स्वामी चिदानन्द ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय संकल्प की अभिव्यक्ति था। इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता, सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः सजग, सक्षम और प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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