टिहरी के तोली गांव में दो साल बाद भी बना हुआ है आपदा का खतरा
नई टिहरी, 04 अगस्त (हि.स.)। टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक के सीमांत तोली गांव में दो साल बाद भी प्राकृतिक आपदा के जख्म नहीं भर पाए हैं। बालगंगा नदी के तेज बहाव से गांव के नीचे भू-कटाव और भू-धंसाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में फिर से खतरे की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से बालगंगा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। गांव के निचले हिस्से में करीब 50 मीटर से अधिक क्षेत्र में गहरी दरारें पड़ गई हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सुरक्षात्मक कार्य शुरू करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2024 की आपदा में तोली गांव में जनहानि हुई थी, जिसमें एक मां और बेटी की मौत हो गई थी। आपदा के बाद स्थायी सुरक्षा और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो साल बाद भी गांव पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शासन-प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया गया, बावजूद इसके समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
प्रशासन का कहना है कि भूस्खलन प्रभावित ऊपरी क्षेत्र का पुनर्वास कराया जा चुका है। बालगंगा नदी किनारे सुरक्षात्मक कार्यों के लिए डीपीआर तैयार कर प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है तथा निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि तोली गांव के विस्थापन और पुनर्वास में किसी भी ग्रामीण के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा गांव अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है और अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। ग्रामीणों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी ने बताया कि मामले में एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

