ग्राम पंचायत हवेली की सुचिता सकलानी: ‘पिस्यूं लूण’ से लखपति बनने की कहानी

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ग्राम पंचायत हवेली की सुचिता सकलानी: ‘पिस्यूं लूण’ से लखपति बनने की कहानी


देहरादून,04 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय आजीविका से जोड़ने की योजनाएं अब जमीनी स्तर पर साफ़ नज़र आने लगी हैं। इन योजनाओं ने उन महिलाओं को नई पहचान दी है, जो कभी घरेलू दायरे तक सीमित थीं और आज अपने क्षेत्र में रोज़गार सृजित कर रही हैं।

टिहरी गढ़वाल जिले के विकासखंड जौनपुर, ग्राम पंचायत हवेली की सुचिता सकलानी इसकी सशक्त मिसाल हैं। वर्ष 2023 तक एक सामान्य गृहिणी रहीं सुचिता सकलानी आज गंगा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं, जिसमें कुल 06 महिलाएँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में समूह ने पारंपरिक पहाड़ी उत्पाद ‘पिस्यूं लूण’ का उत्पादन मार्च 2023 में शुरू किया। यह नमक पहाड़ी जड़ी-बूटियों को सिलबट्टे पर पीसकर तैयार किया जाता है। कददूखाल क्षेत्र में तैयार होने वाला यह उत्पाद आज अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण पहचान बना चुका है।

ग्राम पंचायत हवेली द्वारा सिद्धपीठ माँ सुरकंडा मंदिर के निकट खोले गए NRLM आउटलेट में इस पहाड़ी नमक के साथ-साथ अचार, बुरांश व माल्टा जूस, मोटा अनाज, दालें और मसालों की बिक्री की जा रही है, जहाँ श्रद्धालुओं के बीच ‘पिस्यूं लूण’ की भारी माँग है। नवंबर 2025 तक समूह ने ₹18.50 लाख का कुल टर्नओवर, ₹12.00 लाख की शुद्ध बचत हासिल की है और समूह की सभी महिलाएँ आज लखपति दीदी बन चुकी हैं। विकासखंड जौनपुर द्वारा समूह को ₹20,000 रिवॉल्विंग फंड और ₹4.50 लाख बैंक लिंकेज का सहयोग मिला, जिससे व्यवसाय को मजबूती मिली।

सुचिता सकलानी और गंगा स्वयं सहायता समूह की यह कहानी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से पहाड़ की महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बन सकती हैं। परियोजना निदेशक डीआरडीए पुष्पेंद्र चौहान ने अवगत कराया कि ग्राम पंचायत हवेली की सुचिता सकलानी एवं गंगा स्वयं सहायता समूह की सफलता मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के महिला सशक्तिकरण के विज़न का सशक्त उदाहरण है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय संसाधनों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ‘पिस्यूं लूण’ जैसे पारंपरिक पहाड़ी उत्पादों को बाज़ार से जोड़कर न केवल आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, बल्कि हमारी लोक-संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को भी नई पहचान मिल रही है। यह कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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