कुमाऊं विश्वविद्यालय में जीवन कौशल कार्यशाला में बच्चों को दिये गये आंतरिक शांति के मंत्र

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कुमाऊं विश्वविद्यालय में जीवन कौशल कार्यशाला में बच्चों को दिये गये आंतरिक शांति के मंत्र


नैनीताल, 28 मार्च (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल में दो दिवसीय जीवन कौशल कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला के द्वितीय दिवस सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मधुलता नयाल ने विद्यार्थियों को ‘आंतरिक शांति और खुशी’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में आंतरिक शांति एवं ऊर्जा प्राप्त करने के मंत्र दिये। बताया कि बच्चे कैसे अपने परिवारजनों, बुजुर्गों और अपने चाहने वालों की शक्ति को हमेशा अपने पास महसूस कर सकते हैं और उनसे ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने मानसिक संतुलन, भावनात्मक नियंत्रण तथा आंतरिक संतुष्टि के महत्व पर भी प्रकाश डाला और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से क्रोध प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, कृतज्ञता एवं सकारात्मक सोच के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया, तथा भूमिका निर्वहन, समूह गतिविधियों तथा संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन कौशल विकसित करने की प्रेरणा भी दी। कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास सफलता की आधारशिला हैं।

संचालन करते हुए डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि विचारों की दिशा ही जीवन की दिशा निर्धारित करती है। इस अवसर पर डॉ. नवीन पांडे, डॉ. प्रभा पंत, डॉ. हेम जोशी, डॉ. संदीप मंडोली, डॉ. सीता, डॉ. उजमा सहित वंदना, दिशा, पिंकी दानी, कुंदन व अजय सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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