हरित खेती की ओर बड़ा कदम, हरिद्वार में किसानों को बांटे गए 800 किलो ढैंचा बीज

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हरित खेती की ओर बड़ा कदम, हरिद्वार में किसानों को बांटे गए 800 किलो ढैंचा बीज


हरिद्वार, 12 मई (हि.स.)। सतत एवं जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईआईएफएसआर) के वैज्ञानिकों ने हरिद्वार जनपद में ढैंचा बीज वितरण अभियान आयोजित किया। हरिद्वार, यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना के प्रमुख अध्ययन क्षेत्रों में शामिल है।

अभियान का उद्देश्य किसानों को हरित खाद आधारित पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान किसानों को ढैंचा बीज वितरित किए गए, जिससे प्राकृतिक रूप से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह पहल संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कार्यक्रम में करीब 50 किसानों ने भाग लिया और लगभग 800 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले ढैंचा बीज वितरित किए गए। वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक खेती और पुनर्योजी कृषि (रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर) के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार, ढैंचा एक तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जो भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर प्राकृतिक उर्वरक का कार्य करती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह अभियान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जैव विविधता संरक्षण और कम लागत वाली टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है।

यूएनईपी टीईईबी एग्रीफूड परियोजना कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के आर्थिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए अध्ययन क्षेत्रों में ऐसे नवाचारपूर्ण प्रयास कर रही है, जिससे भारतीय कृषि को हरित और सतत भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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