जयंती पर पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले को किया याद

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हरिद्वार, 03 जनवरी (हि.स.)। ऑल इण्डिया सैनी सेवा समाज व सैनी जागृति मंच केंद्र कनखल स्थित कार्यालय पर पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फूले की जयंती श्रद्धा के साथ मनायी गयी। लोगों ने सावित्री बाई के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष इंजी. बीपी सिंह सैनी ने कहा कि भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी को हुआ था। उन्होंने 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी। वह पहली शिक्षिका थीं। लोगों ने उन पर पत्थर फेंके, लेकिन वह रुकी नहीं। यही वजह है कि लड़कियां पढ़ सकीं।

सावित्रीबाई फुले एक बहादुर समाज सुधारक थीं। उन्होंने ऐसे समय में महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़कर भारतीय इतिहास का रुख बदला, जब लड़कियों को पढ़ने का अधिकार नहीं था। उनका संघर्ष केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि समानता और मानवता के लिए भी था।

मंच के महामंत्री काशीराम सैनी ने कहाकि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था। कम उम्र में ही उनकी शादी ज्योतिराव फुले से हुई थी, जो बाद में एक महान समाज सुधारक बने। उस समय महिलाओं को पढ़ने-लिखने की इजाजत नहीं थी लेकिन ज्योतिराव ने सावित्रीबाई को पढ़ने-लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। ।

1848 में अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। सावित्रीबाई ने हाशिए पर पड़े समुदायों की लड़कियों को पढ़ाया और उन्हें उम्मीद और सम्मान दिया।

इस अवसर पर संरक्षक डा. सूर्यकांत सैनी, नकली सिंह सैनी, मा. रमेश चन्द्र सैनी, समय सिंह सैनी, नवीन सैनी, सतीश सैनी, हिमांशु सैनी, शैली सैनी, मनोज सैनी, लाल सिंह आर्य, सतेन्द्र सैनी, सुदेश सैनी, अंकुर सैनी व अभिषेक सैनी आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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