पंत विवि में अब खबरों का स्त्रोत भी तय करेंगे शिक्षक

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पंत विवि में अब खबरों का स्त्रोत भी तय करेंगे शिक्षक


पंतनगर, 05 जनवरी (हि.स.)। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के छात्रावासों में समाचार पत्रों को लेकर अभिरक्षकों को जारी डीएसडब्ल्यू के पत्र से छात्रों में असंतोष पनप गया है। उनका कहना है कि शिक्षकों को किसने अधिकार दिया कि वह यह तय करें कि हम कौन सा अखबार पढ़ें और कौन सा नहीं। जिस अखबार को पढ़ने का उन पर दबाव डाला जा रहा है, उसमें एक तो स्थानीय खबरों का अभाव रहता है, दूसरे वह सत्ता की चाटुकारिता वाली खबरें ही प्रकाशित करता है।

दरअसल अधिष्ठाता छात्र कल्याण की ओर से बीती चार दिसंबर को सभी अभिरक्षकों को जारी पत्र में छात्रावासों में एक हिंदी और एक अंग्रेजी दैनिक विशेष क्रय करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इससे पहले यदि कोई अन्य समाचार पत्र लिए जा रहे थे, तो उनमें एकरूपता लाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इस आदेश के जारी होने के बाद छात्रों का कहना है कि वर्षों से हॉस्टलों में हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे लोकप्रिय हिंदी समाचार पत्र भी उपलब्ध कराए जाते रहे हैं, जिन्हें छात्र आज भी पढ़ना चाहते हैं।

छात्रों का आरोप है कि बिना उनकी राय लिए और बिना किसी ठोस कारण के यह नियम जबरन लागू कर दिया गया है। पत्र में एकरूपता का हवाला दिया गया है, लेकिन इससे उनकी पसंद और शैक्षणिक जरूरतों की अनदेखी हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए अलग-अलग अख़बार पढ़ना जरूरी होता है। ऐसे में छात्रों को केवल दो तय समाचार पत्रों तक ही सीमित करना उचित नहीं है। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब पहले से हॉस्टलों में विभिन्न अख़बार सुचारू रूप से आ रहे थे और उनका भुगतान भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो रहा था। तो फिर अचानक इस तरह का पत्र जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस आदेश पर पुनर्विचार करने और पहले की तरह हिंदुस्तान व अमर उजाला जैसे अख़बार भी उपलब्ध कराने की मांग की है। अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंंतनगर विवि डॉ. आनंद सिंह जीना ने बताया कि सक्षम अधिकारियों के निर्देश पर यह आदेश जारी किए गए हैं। इस मामले में मैं कोई कमेंट नहीं कर सकता हूं।

हिन्दुस्थान समाचार / डी तिवारी

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