जेन जी में बढ़ रही है आध्यात्मिकता, कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं पर किए गए अध्ययन का निष्कर्ष

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जेन जी में बढ़ रही है आध्यात्मिकता, कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं पर किए गए अध्ययन का निष्कर्ष


नैनीताल, 06 जनवरी (हि.स.)। नैनीताल जनपद स्थित कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर अर्थ एवं संख्या विभाग के द्वारा पर्यटन विभाग के सहयोग से अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2025 के दौरान किये गये एक विस्तृत अध्ययन की रिपोर्ट सामने आ गयी है।

तीन हजार श्रद्धालुओं पर आधारित इस सर्वे में सामने आया कि 67.17 प्रतिशत श्रद्धालु 15 से 30 वर्ष के यानी युवा व जेन-जी आयु वर्ग के हैं और 95.3 प्रतिशत श्रद्धालु केवल आध्यात्मिक उद्देश्य से कैंची धाम आए और 99 प्रतिशत ने एक घंटे से कम समय में दर्शन किए।

साथ ही यह बात भी सामने आयी कि इनमें से 73.4 प्रतिशत श्रद्धालु केवल बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन तक ही सीमित रहे और निकटवर्ती सुप्रसिद्ध वैश्विक पर्यटन स्थल नैनीताल, भवाली, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, कौसानी, जागेश्वर या रानीखेत जैसे अन्य पर्यटन स्थलों तक भी नहीं गए, और 64.77 प्रतिशत श्रद्धालु बिना एक भी रात्रि विश्राम किये तत्काल लौट गये।

अध्ययन के अनुसार केवल 22 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने ही रात्रि में रुककर होटल या होमस्टे में प्रवास किया, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। यानी देश के युवा वर्ग में आध्यात्मिकता बढ़ रही है और वह इसी कारण से कैंची धाम जैसे आध्यात्मिक स्थलों की ओर आ रहे हैं और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों से भी उनका मोहभंग हो रहा है। हालांकि कैंचीधाम से अक्सर सामने आने वाली घटनाएं इन तथ्यों पर प्रश्न भी खड़े करती रही हैं।

बहरहाल अध्ययन के अनुसार अध्ययन में शामिल कुल श्रद्धालुओं में 82.47 प्रतिशत उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से आए। सुविधाओं को लेकर 74 प्रतिशत श्रद्धालु पार्किंग, 58 प्रतिशत शौचालय व स्वच्छता और 52 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं से असंतुष्ट पाए गए। पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की योजना तैयार की जा रही है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जून से 400 वाहनों की नई पार्किंग व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है, जिससे अव्यवस्था और जाम की समस्या में सुधार की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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