सात प्रकरणों में 91 नाली भूमि राज्य सरकार में निहित
नैनीताल, 26 सितंबर (हि.स.)। निर्धारित प्रयोजन के विपरीत भूमि का उपयोग किए जाने के सात प्रकरणों में उपजिलाधिकारी नैनीताल के न्यायालय ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की उत्तराखंड में यथाप्रवृत्त धारा 166/167 के तहत कुल 1.822 हेक्टेयर यानी 91 नाली एक मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशन में हुई कार्रवाई के संबंध में उन्होंने कहा कि भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत रखने तथा भू कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उपजिलाधिकारी नवाजिश खलीक के अनुसार राजस्व अभिलेखों और स्थलीय जांच में ग्राम कमड़ा तथा ग्राम शीतला, पट्टी मल्ली कुटौली में धार्मिक प्रयोजन के लिए क्रय की गई कुल 1.562 हेक्टेयर भूमि पर कोई धार्मिक गतिविधि संचालित नहीं मिली और भूमि खाली पाई गई। वहीं ग्राम सतबूंगा, पट्टी सतबूंगा में कृषि प्रयोजन के लिए क्रय की गई 0.260 हेक्टेयर भूमि कृषि कार्य में उपयोग नहीं की जा रही थी और मौके पर बंजर मिली। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
अनुमति, राजस्व अभिलेख, अनुमति की शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों और स्थलीय जांच आख्या के परीक्षण के बाद भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन के लिए नहीं किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद सातों प्रकरणों में संबंधित अंतरणों को विधि-विरुद्ध मानते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर भूमि को सभी भारों से मुक्त कर राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए गए। संबंधित राजस्व अधिकारियों को अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियां करने और नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

