सुधरा स्वास्थ्य तंत्र: पौड़ी गढ़वाल में मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट, 92 फीसद प्रसव अब अस्पतालों में

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सुधरा स्वास्थ्य तंत्र: पौड़ी गढ़वाल में मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट, 92 फीसद प्रसव अब अस्पतालों में


देहरादून, 19 जुलाई (हि.स.)। उत्तरांखंड के पौड़ी गढ़वाल में स्वास्थ्य क्रांति का असर धरातल पर दिखने लगा है, जहाँ संस्थागत प्रसव का आंकड़ा अब 92 प्रतिशत तक पहुँच गया है। सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते न केवल मातृ-शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है, बल्कि जिले की चिकित्सा व्यवस्था भी एक नए मुकाम पर पहुंच गई है।

पौड़ी गढ़वाल जिले के वर्तमान मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. शिव मोहन शुक्ला के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों का सकारात्मक प्रभाव जनपद के स्वास्थ्य सूचकांकों में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मातृ मृत्यु दर 113 से घटकर 91 तथा शिशु मृत्यु दर 34 से घटकर 27 हो गई है। कुल प्रजनन दर 2.1 से घटकर 1.8 पर पहुंची है। प्रथम तिमाही गर्भ पंजीकरण 56 प्रतिशत से बढ़कर 82 प्रतिशत, चार एएनसी जांच 62 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत, गर्भवती महिलाओं का पूर्ण टीकाकरण 92 से बढ़कर 96 प्रतिशत तथा शिशुओं का पूर्ण टीकाकरण 92 से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है। संस्थागत प्रसव 63 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत तथा लिंगानुपात 941 से बढ़कर 956 तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के संकल्प के साथ, पौड़ी गढ़वाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव से यह संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चिकित्सा अवसंरचना के आधुनिकीकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने पौड़ी गढ़वाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी जनपद ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2019-20 में जहां केवल तीन चिकित्सा इकाइयों में अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध थी, वहीं आज यह सुविधा नौ चिकित्सा इकाइयों तक विस्तारित हो चुकी है। 'खुशियों की सवारी' योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित परिवहन तथा संस्थागत प्रसव की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी निरंतर बढ़ाया गया है। वर्ष 2019-20 में जहां 108 एम्बुलेंस सेवा 17 स्थानों पर उपलब्ध थी, वहीं अब यह सेवा 28 स्थानों तक विस्तारित हो चुकी है। इसके अतिरिक्त 11 'खुशियों की सवारी' वाहन गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रूप से स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

जिले में स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए थलीसैंण में उपजिला चिकित्सालय का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत दो ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट संचालित हैं, जबकि सात नई इकाइयों का निर्माण कार्य जारी है। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय में डिस्ट्रिक्ट इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेट्री स्थापित की जा रही है, जिससे रोगों की वैज्ञानिक एवं समयबद्ध जांच की सुविधा और अधिक सुदृढ़ होगी।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जनपद के 151 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के रूप में विकसित किया गया है। इन केंद्रों पर सामान्य उपचार के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों, क्षय रोग, मानसिक स्वास्थ्य, नेत्र एवं कान संबंधी रोगों सहित 12 प्रकार की समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की तैनाती से ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार एवं स्वास्थ्य परामर्श की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

(सीएमओ) डॉ. शिव मोहन शुक्ला के मुताबिक, सरकार द्वारा वर्षों से रिक्त पड़े चिकित्सकों के पदों पर भर्ती के साथ-साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जा रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध हो रहा है।

सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान मोड में कार्य कर रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास से जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए इन प्रयासों से पौड़ी गढ़वाल आज बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ बचपन और सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है और स्वस्थ पौड़ी, सशक्त उत्तराखण्ड के संकल्प को धरातल पर साकार कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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