पृथ्वी से पाप का भार कम करने वन चले श्रीरामः डॉ वेदांती

हरिद्वार, 11 जून (हि.स.)। कथा व्यास डॉ रामविलास दास वेदांती महाराज ने कहा कि भगवान राम की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता। भगवान राम स्वयं ही अपनी लीला को पूरा करने के लिए वन जाना चाहते थे, क्योंकि वन में उन्हें हनुमान से मिलना था। सबरी का उद्धार करना था। धरती पर धर्म और मर्यादा की सीख देनी थी। इसलिए जन्म से पहले ही राम यह तय कर चुके थे कि उन्हें वन जाना है और पृथ्वी से पाप का भार कम करना है।

वशिष्ठ भवन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रही श्रीमद् वाल्मीकीय श्रीराम कथा के छठे दिवस पर कथा व्यास डॉ रामविलास दास वेदांती महाराज ने वन प्रसंग का बखान करते हुए कहा कि रामायण का शाब्दिक अनुवाद राम का अयन या राम की यात्रा है। महाकाव्य में यह यात्रा भगवान राम की सौतेली मां कैकेयी द्वारा शुरू की गई है, जो चाहती है कि उसका बेटा भरत युवराज बने। वह रणनीतिक रूप से कुछ वरदानों का आह्वान करती हैं और भगवान राम के लिए जंगल में 14 साल के वनवास की योजना बनाती है।

अपने पिता के धर्म को कायम रखने के लिए भगवान राम स्वेच्छा से स्वीकार करते हैं और उस रास्ते पर निकल पड़ते हैं, जिस पर उनका मानना है कि नियति ने उनके लिए यही लिखा है।

हिन्दुस्थान समाचार/ रजनीकांत/दधिबल

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