श्रीमद्भागवत कथा अनवरत बहने वाली ज्ञान गंगा है : विष्णु दास महाराज

हरिद्वार, 16 मई (हि.स.)। श्री गुरु सेवक निवास में उन्नीसवीं गुरु स्मृति महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आखिरी दिन उछाली आश्रम के परमाध्यक्ष महंत विष्णु दास महाराज ने कहा कि इस कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा अनवरत बहने वाली ज्ञान गंगा है। पवित्र बैशाख मास में गंगा तट पर संत महापुरुषों के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण और आयोजन दोनों ही परम कल्याणकारी हैं।

कथा व्यास आचार्य रवि शंकर ने श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालु भक्तों को सुदामा चरित्र की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की पुकार पर दौड़े चले आते हैं और उनके सभी कष्टों का निवारण कर देते हैं। सुदामा और कृष्ण परम मित्र थे। बेहद गरीबी में जीवन गुजार रहे सुदामा पत्नी के कहने पर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे। सुदामा के आने का समाचार मिलने पर श्रीकृष्ण नंगे पैर दौड़े आए और मित्र सुदामा को गले लगा लिया। श्रीकृष्ण ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाया और बिना कुछ मांगे ही उनके सभी दुखों को दूर कर उन्हें सर्वस्व अर्पण कर दिया। कथाव्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मृत्यु का भय समाप्त कर मोक्ष प्रदान करती है।

श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित काे मृत्यु का भय दूर हुआ और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी प्रकार बुरे कर्मो के कारण अधोगति में पड़े धुंधकारी को श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से बैकुण्ठ धाम में स्थान प्राप्त हुआ। इससे पूर्व कथा के अंतिम दिन मौजूद श्रद्धालुओं ने संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार/ रजनीकांत/सत्यवान/रामानुज

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