दुष्कर्म करने वाले को 20 वर्ष की कैद

हरिद्वार, 02 अप्रैल (हि.स.)। नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने के मामले में अपर जिला जज, एफटीएससी संगीता आर्य ने आरोपित युवक को दोषी करार दिया है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी युवक को 20 वर्ष कठोर कारावास व 40 हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान ने बताया कि 10 अक्टूबर 2018 पथरी क्षेत्र के गांव में एक नौ वर्षीय कक्षा चार में पढ़ने वाली बच्ची ने स्कूल प्रधानाध्यापिका से अपने पिता पर उसके साथ छेड़छाड़ व बदतमीजी करने की शिकायत की थी। स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने बच्ची के पिता के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पीड़ित बच्ची के पिता के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई थी। विचारण कोर्ट ने आरोपित पिता के विरुद्ध गंभीर धाराओं में आरोप तय किए।

विचारण कोर्ट में पीड़ित बच्ची ने अपनी गवाही देते हुए बताया कि उसके साथ पिता ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। चार वर्ष पूर्व सुमित की माता ने स्कूल की प्रिंसिपल से उसके पिता पर झूठा केस दर्ज कराया था। पीड़ित बच्ची ने बताया कि सुमित उसका मामा लगता है और उसी ने घर पर अकेली होने का फायदा उठाकर उसके साथ गलत काम किया था। यही नहीं, पीड़ित बच्ची ने सुमित पर गंदी गंदी वीडियो दिखाने व किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया था। अभियोजन पक्ष के लिखित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद विचारण कोर्ट ने आरोपित सुमित को तलब किया था। आरोपित सुमित सिंह के विरुद्ध आरोप तय किए गए। दोबारा से अभियोजन साक्षी पेश किए गए। अभियोजन पक्ष ने कुल पांच गवाह पेश किए। जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किया।

पीड़िता के पिता की हो चुकी मृत्यु-

पीड़ित बच्ची की माता का पथरी क्षेत्र के गांव में मायका है। घटना से पहले पीड़िता अपने माता-पिता के साथ अपनी ननिहाल आ गई थी। यहां पर पीड़िता के माता पिता मजदूरी आदि का काम कर पालन पोषण कर रहे थे। पीड़िता भी खाली समय में आरोपी के घर पर घरेलू कार्य करती थी। इसी दौरान आरोपी सुमित सिंह ने बच्ची के साथ जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। हालांकि, केस विचारण के दौरान ही पीड़ित बच्ची के पिता की मृत्यु हो गई थी।

दो लाख की आर्थिक सहायता-

विचारण कोर्ट ने पीड़ित बच्ची के मानसिक, आर्थिक व पारिवारिक स्थिति को देखते हुए दो लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने के आदेश दिए हैं। विचारण कोर्ट ने उक्त निर्णय की एक प्रति स्थानीय जिलाधिकारी व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा-

विशेष कोर्ट ने आरोपी युवक को 20 वर्ष कठोर कैद व 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड राशि जमा नहीं करने पर उसे छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

हिन्दुस्थान समाचार/ रजनीकांत/रामानुज

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