गौला उफान पर सुरक्षित मिली प्रोटेक्शन वॉल अधूरे काम और 2 करोड़ के लंबित प्रस्ताव ने बढ़ाई चिंता
हल्द्वानी , 01 सितंबर (हि.स.)। पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब गौला नदी के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। इस बरसात पहली बार गौला नदी उफान पर नजर आ रही है, जिससे काठगोदाम और हल्द्वानी क्षेत्र में सतर्कता बढ़ गई है।
बढ़ते जलस्तर के बीच लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रत्युष कुमार ने हल्द्वानी-चोरगलिया रोड पर रेलवे फाटक से गौला पुल को जोड़ने वाली सड़क का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नदी किनारे बनाया गया प्रोटेक्शन वर्क फिलहाल सुरक्षित पाया गया। यह वही सड़क है, जो विगत वर्षा काल में गौला नदी के तेज बहाव के चलते क्षतिग्रस्त हो गई थी। सड़क के पुनर्निर्माण के बाद नदी की ओर सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन वर्क कराया गया था। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच लोनिवि के अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य और वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
हालांकि मौजूदा प्रोटेक्शन वर्क सुरक्षित बताया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा दीवार से जुड़े कुछ अन्य कार्य अभी बजट की उपलब्धता के कारण रुके हुए हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रत्युष कुमार ने बताया कि शेष कार्य को पूरा कराने के लिए आपदा विभाग को ₹2 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन प्रस्ताव अभी लंबित है।
ऐसे में गौला नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अधूरे सुरक्षा कार्य को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। फिलहाल जो प्रोटेक्शन वर्क पूरा किया गया है, वह सुरक्षित है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में पहाड़ों में बारिश और तेज होती है और गौला का जलस्तर और बढ़ता है, तो अधूरे कार्य वाले हिस्सों पर दबाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पिछले वर्ष इसी मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के बाद सड़क का पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्य कराया गया था। इस बार मानसून के बने इस मार्ग की सुरक्षा को चर्चा में ला दिया है। बड़ा सवाल यही है कि यदि आगामी दिनों में गौला का जलस्तर और बढ़ता है और प्रोटेक्शन वॉल या सड़क को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल PWD की ओर से मौके का निरीक्षण कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
दो करोड़ के प्रस्ताव के लंबित रहने और शेष सुरक्षा कार्य के अधूरे होने के बीच अब निगाहें आपदा विभाग की मंजूरी पर टिकी हैं। बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच समय रहते शेष प्रोटेक्शन वर्क पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता

