आईआईटी रुड़की की नई पहल: नेट जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम

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आईआईटी रुड़की की नई पहल: नेट जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम


आईआईटी रुड़की की नई पहल: नेट जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम


हरिद्वार, 21 अप्रैल (हि.स.)। भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने अल्ट्रा लो हेड और हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइनों के अनुसंधान एवं विकास के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा स्थापित की है। यह पहल भारत के नेट जीरो 2070 लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस सुविधा का उद्घाटन संतोष कुमार सारंगी, सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लघु जलविद्युत ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ बड़े स्तर पर रोजगार सृजन का माध्यम बनेगा। उनके अनुसार, 2030-31 तक परियोजनाओं से 50 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित हो सकते हैं, जो इसे आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

क्या है नई सुविधा की खासियत

आईआईटी रुड़की के जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग में विकसित यह सुविधा दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित है। प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व और एमएनआरई के सहयोग से विकसित यह प्रणाली निम्नलिखित विशेषताओं से लैस है। 1 से 4 मीटर तक के बेहद कम जल-स्तर (हेड) पर भी बिजली उत्पादन, ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज प्रोपेलर आधारित टर्बाइन डिजाइन है।

मछली-अनुकूल स्क्रू टर्बाइन तकनीक व सिंचाई नहरों, जल शोधन संयंत्रों और अपशिष्ट जल आउटफॉल में उपयोग की क्षमता। यह तकनीक उन स्थानों पर ऊर्जा उत्पादन संभव बनाएगी, जहां पारंपरिक जलविद्युत प्रणालियां काम नहीं कर पातीं।

फ्लोटिंग सोलर और अन्य शोध पर भी फोकस

दौरे के दौरान सचिव ने संस्थान की फ्लोटिंग सोलर तकनीक, जलाशय प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और नीति अनुसंधान क्षमताओं की भी सराहना की। साथ ही, हाइड्रो, सौर, बायोमास, हाइड्रोजन, ग्रिड इंटीग्रेशन और स्वदेशी बैटरी विकास जैसे क्षेत्रों में चल रहे अनुसंधानों की समीक्षा की गई।

कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा कि यह नई सुविधा विश्वसनीय और विस्तार योग्य ऊर्जा समाधान विकसित करेगी। राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं को मजबूती देगी। वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में योगदान करेगी।

अपने दौरे के दौरान सचिव ने 1945 में स्थापित मोहम्मदपुर पावर हाउस और गंगा नदी पर स्थित चिल्ला जलविद्युत परियोजना का भी निरीक्षण किया, जिससे भारत में लघु जलविद्युत की ऐतिहासिक और वर्तमान भूमिका को समझा जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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