उक्रांद के पूर्व केंद्रीय संरक्षक और नैनीताल के पूर्व विधायक डॉ. जंतवाल का निधन
नैनीताल, 07 नवंबर (हि.स.)। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में शामिल, नैनीताल के पूर्व विधायक और उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का 66 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया है। कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे डॉ. जंतवाल नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली गये थे, जहां उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उपचार के दौरान शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से नैनीताल सहित पूरे कुमाऊं और उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों, राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों में शोक छा गया है।
डॉ. जंतवाल उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के सक्रिय नेतृत्वकर्ताओं और उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। अलग राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में उन्होंने नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वह कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ के उपसचिव, सचिव और अध्यक्ष रहे तथा छात्र महासंघ के अध्यक्ष का दायित्व भी संभाला।
उत्तराखंड क्रांति दल में उन्होंने केंद्रीय अध्यक्ष और बाद में संरक्षक के रूप में संगठन का नेतृत्व किया। विधायक रहते हुए उन्होंने नैनीताल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने एमए, एलएलबी और पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की थी तथा अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया।
डॉ. जंतवाल ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन, वनाधिकार आंदोलन सहित उत्तराखंड के अनेक जन आंदोलनों में सक्रिय रहे। जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पहाड़ के विकास को लेकर वह लगातार आवाज उठाते रहे। स्थायी राजधानी गैरसैंण, मूल निवास, भू-कानून, पलायन और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे उनके पासराजनीतिक संघर्ष के प्रमुख विषय रहे। हाल ही में उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने सहित विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर निकाली गई यात्रा में भी वह शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने गैरसैंण, चौखुटिया और द्वाराहाट सहित विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर पार्टी के मुद्दे उठाये।
उनके निधन पर पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी, दर्जा मंत्री शांति मेहरा, नैनीताल विधायक सरिता आर्य और पूर्व विधायक संजीव आर्य सहित अनेक राजनीतिक एवं सामाजिक व्यक्तित्वों ने शोक व्यक्त किया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की ओर से डॉ. ललित तिवारी, डॉ. नीलू, डॉ. दीपक, डॉ. युगल, डॉ. संतोष, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. दीपिका गोस्वामी, कांग्रेस नेता रईस भाई और डॉ. अशोक कुमार, विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी प्रकोष्ठ की ओर से डॉ. बीएस कालाकोटी, डॉ. एसएस सामंत, डॉ. जीसी जोशी, ज्योति कांडपाल, डॉ. मीना पांडे और डॉ. भुवन आर्य ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। नगर कांग्रेस परिवार ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से नैनीताल लाया जा रहा है।
इधर, नैनीताल की पूर्व सभासद निर्मला चंद्रा के पति राजेश चंद्रा का भी शुक्रवार को निधन हो गया। वह पूर्व नगर के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल में कार्यरत थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनके हृदय की शल्य चिकित्सा भी हुई थी। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया गया। वह अपने पीछे पत्नी निर्मला चंद्रा और एक पुत्री छोड़ गये हैं।
उनके निधन से परिजनों, परिचितों और विद्यालय से जुड़े लोगों में शोक है। दो दिन पूर्व नगर के प्रमुख राज्य आंदोलनकारी व नयना देवी मंदिर के पुजारी लक्ष्मीनारायण लोहनी का भी आकस्मिक निधन हो गया था। इस प्रकार दीपावली के अवसर पर नगर के ऐसी कई घटनाओं से शोक का माहौल भी बन गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

