प्राचीन विरासत और आधुनिक विकास का समन्वय ही भारत की पहचान: रामदेव

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प्राचीन विरासत और आधुनिक विकास का समन्वय ही भारत की पहचान: रामदेव


हरिद्वार, 21 मई (हि.स.)। धर्मनगरी हर की पैड़ी पर इन दिनों गंगा के पावन प्रवाह के साथ ज्ञान, भक्ति और धर्म की अविरल धारा भी प्रवाहित हो रही है। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर मालवीय घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

स्वामी रामदेव ने कथा स्थल पहुंचकर व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की और कथा आयोजन को सनातन संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी प्राचीन विरासत, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों में बसती है। आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखना ही देश की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति के संस्कार हमारे डीएनए में समाहित हैं। हमारे भीतर देवत्व, रामत्व, राधत्व और शिवत्व विद्यमान है। हमारे आचार-विचार, आहार और व्यवहार में सनातन संस्कृति की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से आगे बढ़ाए।

कथा व्यास पुण्डरीक गोस्वामी ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार और अधर्म बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना का संकल्प लिया।

कथा के दौरान जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर भजनों पर झूमते नजर आए। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा और धर्म का संदेश देने के लिए हुआ था।

श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने योगगुरु स्वामी रामदेव का स्वागत करते हुए कहा कि मां गंगा का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने कथा आयोजन के यजमान अमृतसर के अग्रवाल परिवार सहित सभी श्रद्धालुओं के मंगल की कामना की।

इस अवसर पर श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, उपाध्यक्ष हनुमंत झा, स्वागत मंत्री सिद्धार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान, उज्जवल पंडित, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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