चेन्नई में गूंजी उत्तराखंड की फिल्म नीति, तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई शूटिंग में रुचि

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चेन्नई में गूंजी उत्तराखंड की फिल्म नीति, तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई शूटिंग में रुचि


चेन्नई/देहरादून, 08 सितंबर (हि.स.)। चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और राज्य की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक शूटिंग लोकेशंस को मंगलवार को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई निर्माता और निर्देशकों ने उत्तराखंड में फिल्मांकन में रुचि दिखाई।

कॉन्क्लेव में देश-विदेश के फिल्म निर्माता और फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद और महाराष्ट्र एफएससीडीसी सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी केएस चौहान ने राज्य की फिल्म नीति और शूटिंग की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड में हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्माई गई फिल्मों को तीन करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि फिल्म शूटिंग की अनुमति ऑनलाइन और सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से सात दिनों के भीतर देने की व्यवस्था है। शूटिंग शुल्क माफ किया गया है तथा शूटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और जीएमवीएन एवं केएमवीएन के गेस्ट हाउसों में विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार, प्रदेश में प्रतिवर्ष 200 से अधिक फिल्मों, वेब सीरीज और धारावाहिकों की शूटिंग हो रही है।

कॉन्क्लेव के दौरान चौहान ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें भी कीं। इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, बीटीजीआई प्रोडक्शंस, पारसा पिक्चर, लाइका प्रोडक्शंस, मसाला पिक्स, कवि क्रिएशन्स और ड्रीम वारियर पिक्चर्स समेत कई प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में शूटिंग के प्रति रुचि जताई।

केएस चौहान ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियां, सांस्कृतिक विरासत और अनुकूल फिल्म नीति इसे फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त बनाती हैं। कॉन्क्लेव में सहभागिता से उत्तराखंड में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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