ब्लॉगरों की भ्रामक खबरों से केदार यात्रा में पड़ रहा प्रभाव

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ब्लॉगरों की भ्रामक खबरों से केदार यात्रा में पड़ रहा प्रभाव


ब्लॉगरों की भ्रामक खबरों से केदार यात्रा में पड़ रहा प्रभाव


- केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे की पहाड़ी पर टूट रहे ग्लेशियर

- तीर्थ पुरोहितों ने श्रद्धालुओं से कहा, हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटनाएं सामान्य

- पर्यावरण विशेषज्ञों ने मौसम में आये परिवर्तन को बताया कारण

रुद्रप्रयाग, 10 जून (हि.स.)। केदारनाथ धाम में आये दिन एवलांच जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। आयेदिन हो रही इस प्रकार की घटनाओं को स्थानीय लोग सामान्य घटना बता रहे हैं। उनकी मानें तो केदारनाथ धाम हिमालयी क्षेत्र में बसा है। ऐसे में इस स्थान पर ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाएं होना सामान्य बात है। कुछ यूट्यूबर ब्लॉगर धाम में रहकर गलत खबरों को फैलाकर अपने चैनल को फेमस करना चाहते हैं जिससे चैनल को लाइक के साथ फॉलोअर्स बढ़ सकें। हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञ इन घटनाओं के लिए मौसम में आये परिवर्तन को कारण मानते हैं।

बता दें कि केदारनाथ धाम 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हिमालय में बसे बाबा केदारनाथ धाम में इन दिनों ग्लेशियर टूटने की घटनाएं हो रही हैं जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और देश-विदेश से यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु भयभीत हो रहे हैं। कपाट खुलने के बाद से सैकड़ों की संख्या में यूट्यूबर ब्लॉगर केदारनाथ धाम में रहकर तरह-तरह की वीडियो बना रहे हैं और इन वीडियो की रील्स बनाकर अपने चैनल को फेमस करने की कोशिशें करने में लगे हैं। केदारनाथ धाम के ठीक पीछे चोराबाड़ी ताल है। वर्ष 2013 में इस ताल के टूटने से केदारनाथ आपदा ने जन्म लिया और इस बाढ़ ने सबकुछ हिलाकर रख दिया। इसके बाद से ही इस क्षेत्र में हल्की सी घटना होने पर शोर बहुत ज्यादा मचना शुरू हो जाता है। बीते दिन चोराबाड़ी से चार किमी ऊपर हिमालय में हल्का सा ग्लेशियर टूटा तो केदारनाथ धाम में रह रहे कुछ यूट्यूबर ब्लॉगरों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे देश-विदेश से यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं में भय की स्थिति पैदा हो और उनके चैनल को लाइक के साथ फॉलोअर्स तेजी से बढ़ें। केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित हिमांशु तिवारी ने बताया कि केदारनाथ धाम में सैकड़ों की संख्या में यूट्यूबर ब्लॉगर घूम रहे हैं। केदारनाथ कपाट खुलने के बाद से ये लोग धाम में रहकर धाम को बदनाम करने की कोशिशें कर रहे हैं। देश-विदेश से यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं में भय की स्थिति पैदा कर रहे हैं। तीर्थयात्रियों को डराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम के ठीके पीछ चोराबाड़ी क्षेत्र में इस प्रकार की ग्लेशियर टूटने की घटनाएं होती रहती हैं। भ्रामक जानकारियां फैलाकर लोगों को भ्रमित करने वालों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा में जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। तीर्थयात्रियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा से लेकर उनके लिए रहने-खाने सहित तमाम प्रकार की व्यवस्थाएं धाम में की गई हैं। हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाओं से घबराने की जरूरत नहीं हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री ने कहा कि आपदा के बाद से केदारनाथ में निर्माण कार्य चल रहे हैं। इस कारण मौसम में काफी बदलाव आ गया है। समय पर बारिश और बर्फबारी नहीं हो रही है। इस माह गिर रही बर्फ हिमालय में टिकती नहीं है, जिस कारण फिसलकर नीचे आती है और एवलांच जैसी घटना दिखाई देती है। अभी भी समय रहते हिमालय को बचाने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम जैसे विषम परिस्थितियों वाले क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवाओं को भी बंद किया जाना चाहिए। ये भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित

/प्रभात

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