बड़ी उपलब्धि: 100 करोड़ रुपये की मेगा बहु-संस्थागत शोध परियोजना में शामिल हुआ कुमाऊं विश्वविद्यालय

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बड़ी उपलब्धि: 100 करोड़ रुपये की मेगा बहु-संस्थागत शोध परियोजना में शामिल हुआ कुमाऊं विश्वविद्यालय


नैनीताल, 16 अप्रैल (हि.स.)। कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की ‘पार्टनरशिप फॉर एकेडमिक एंड रिसर्च एडवांसमेंट’ योजना के अंतर्गत देश की एक प्रमुख बहु-संस्थागत शोध परियोजना में सम्मिलित किया गया है।

यह परियोजना भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के नेतृत्व में संचालित होगी, और इसमें देशभर से चयनित केवल छह शोध समूहों में से एक समूह का हिस्सा कुमाऊँ विश्वविद्यालय भी बनेगा।

बताया गया है कि इस चयन के माध्यम से कुमाऊं विश्वविद्यालय ने एक बार फिर राष्ट्रीय शोध जगत में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। इस लगभग 100 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना हेतु देशभर के 17 संस्थानों ने आईआईएससी बेंगलुरु के साथ मिलकर प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे। इनमें से केवल सात संस्थानों को चयनित कर एक शोध समूह गठित किया गया। इसके उपरांत इस समूह ने देश के अन्य प्रतिस्पर्धी समूहों के साथ डीएसटी की एम्पावर्ड कमेटी के समक्ष अपनी परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया, और अंतिम रूप से देश के केवल कुमाऊं विश्वविद्यालय, बेंगलुरु विश्वविद्यालय, भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान शिबपुर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान नागालैंड, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर तथा कालीकट विश्वविद्यालय के छह शोध समूहों को ही स्वीकृति प्रदान की गई है।

बताया गया है कि परियोजना के अंतर्गत मुख्यतः तीन शोध क्षेत्रों-प्लास्टिक कचरे से नवाचारपूर्ण ढंग से उच्च दक्षता वाले कार्बन नैनोमैटेरियल्स व द्वि-आयामी नैनोसंरचनाओं के संयोजन से सुपरकैपेसिटर का निर्माण, जैव चिकित्सा क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाले चुम्बकीय व विद्युतचुम्बकीय विकिरण अवरोधक पदार्थों का विकास तथा कैंसर के उपचार हेतु प्रभावशाली औषधि वहन प्रणाली के लिए नवीन नैनो संरचनाओं के निर्माण पर कार्य किया जाएगा। कुमाऊँ विवि के कुलपति प्रो दीवान रावत ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह परियोजना विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त शोध मंच प्रदान करेगी और हमारे शिक्षकों व विद्यार्थियों को अग्रणी संस्थानों के साथ भविष्य की तकनीकों पर कार्य करने का सुअवसर देगी।

यह न केवल कुमाऊं विश्वविद्यालय की शोध क्षमताओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि राज्य व देश के नवाचार-आधारित विकास में भी योगदान देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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