नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित व्यापारी नेता की जमानत खारिज

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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित व्यापारी नेता की जमानत खारिज


नैनीताल, 24 जुलाई (हि.स.)। नैनीताल के अपर जिला न्यायाधीश एवं एफटीएससी (पोक्सो) के विशेष न्यायाधीश सुधीर तोमर ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित भवाली के व्यापारी नेता नरेश पांडे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपित के विरुद्ध थाना मल्लीताल में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64, 115, 351(3) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 3/4 एवं 16/17 के अंतर्गत अभियोग दर्ज है।

अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने आरोपित के जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि पीड़िता ने तहरीर, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 तथा 183 के अंतर्गत दिए गए बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि 4 अक्टूबर 2025 को सह-अभियुक्त छात्रा नेत्री युवती उसे अपने मित्र नरेश पांडे से मिलने के बहाने काठगोदाम स्थित एक होटल में ले गी।

जहां नरेश पांडे ने उसके साथ जबरन बल प्रयोग कर दुष्कर्म किया। अभियोजन के अनुसार घटना के समय पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम थी, और वह विधि के अनुसार नाबालिग थी। पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण बीडी पांडे जिला चिकित्सालय नैनीताल में कराया गया, जिसमें उसके बयान दर्ज किए गए तथा चिकित्सकीय परीक्षण में अभियोजन के अनुसार दुष्कर्म के आरोपों का समर्थन करने वाले तथ्य सामने आए।

अभियोजन ने न्यायालय को यह भी बताया कि आरोपित का आपराधिक इतिहास है। उसके विरुद्ध थाना भवाली में मारपीट सहित आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें गुंडा अधिनियम का मामला भी शामिल है। इसके अतिरिक्त थाना मल्लीताल में सह अभियुक्त छात्रा-नेत्री से दुष्कर्म करने से संबंधित एक अन्य प्रकरण भी उसके विरुद्ध दर्ज है, जिसमें उसकी अग्रिम जमानत याचिका सत्र न्यायालय तथा उच्च न्यायालय दोनों स्तरों पर निरस्त हो चुकी है।

अभियोजन का यह भी कहना था कि सह-अभियुक्त युवती के विरुद्ध भी इसी प्रकरण में संबंधित धाराओं के अंतर्गत विवेचना जारी है। न्यायालय ने अभियोजन प्रपत्रों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपित के विरुद्ध गंभीर आरोप हैं। पीड़िता ने अपने बयानों में घटना का समर्थन किया है तथा अन्य गवाहों के बयान भी अभियोजन के पक्ष में हैं।

मामले की विवेचना अभी प्रचलित है और इस स्तर पर जमानत दिए जाने से पीड़िता एवं अन्य गवाहों के प्रभावित होने तथा आरोपित के फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों तथा आरोपित के आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इन्हीं परिस्थितियों में न्यायालय ने नरेश पांडे की जमानत याचिका निरस्त कर दी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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