भूमि धोखाधड़ी के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

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भूमि धोखाधड़ी के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज


नैनीताल, 24 जुलाई (हि.स.)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल प्रशांत जोशी ने भूमि धोखाधड़ी के मामले के एक आरोपित रोशन लाल पुत्र मनोहर लाल निवासी मेहरागांव, नौला, भवाली की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 316(4) के अंतर्गत प्रस्तुत अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि 18 अप्रैल 2026 को थाना भवाली में शीला मेहता पत्नी अर्जुन सिंह मेहता निवासी पुलिस लाइन तल्लीताल नैनीताल ने आरोपित रोशन लाल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

प्राथमिकी के अनुसार आरोपित ने मेहरागांव, नौला क्षेत्र में एक नाली भूमि 26 लाख रुपये में बेचने का अनुबंध किया तथा अनुबंध के समय आठ लाख रुपये अग्रिम के रूप में प्राप्त कर लिए। इसके बाद दो वर्ष तक भूमि की रजिस्ट्री कराने के नाम पर टालमटोल करता रहा। जब शिकायतकर्ता संबंधित भूमि देखने पहुंची तो पता चला कि भूमि आरोपित की न होकर अनुसूचित जाति की महिला अनीता देवी के नाम दर्ज है।

अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता ने भूमि खरीदने के लिए भारतीय स्टेट बैंक से 14 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसमें से आठ लाख रुपये आरोपित को अग्रिम दिए गए, जबकि एक लाख रुपये भूमि को कृषि से अकृषि प्रयोजन के लिए परिवर्तित कराने के नाम पर छलपूर्वक ले लिए गए। न्यायालय ने अपने आदेश में इस तथ्य को भी गंभीर माना कि आरोपित ने पूर्व में उच्च न्यायालय नैनीताल से अग्रिम जमानत प्राप्त की थी।

उच्च न्यायालय ने सात लाख रुपये में से साढ़े तीन लाख रुपये पांच सप्ताह के भीतर शिकायतकर्ता को लौटाने की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी तथा स्पष्ट किया था कि निर्धारित धनराशि जमा नहीं करने की स्थिति में गिरफ्तारी पर रोक प्रभावी नहीं रहेगी। अभियोजन के अनुसार आरोपित ने उच्च न्यायालय में निर्धारित अगली तिथि से पहले ही अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली और उसके बाद सत्र न्यायालय में पुनः अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत कर दी।

न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। ऐसे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अभियुक्त अपनी सुविधा के अनुसार बार-बार अपना पक्ष परिवर्तित नहीं कर सकता। आरोपों की गंभीरता तथा आरोपित के आचरण को देखते हुए न्यायालय ने रोशन लाल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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