पर्यावरण संरक्षण और भूमि सुधार पर ठोस कार्ययोजना पर फोकस

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पौड़ी गढ़वाल, 18 अप्रैल (हि.स.)। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना (जीआईजेड) एवं “भारत में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के क्रियान्वयन हेतु वन एवं वृक्ष आच्छादन की बहाली, संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए वन परिदृश्य पुनर्स्थापन दृष्टिकोणों के कार्यान्वयन” के अंतर्गत संभावित विकास कार्यों को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गयी।

बैठक में जिला समन्वय समिति के सदस्यों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा योजना के तकनीकी, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही वन एवं वृक्ष आच्छादन में वृद्धि, भूमि क्षरण की रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने हेतु समेकित एवं दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गयी। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में स्थल का चयन कर योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि चयनित समूह क्षेत्र में आजीविका गतिविधियों की स्पष्ट एवं व्यावहारिक रूपरेखा तैयार की जाए, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ मिल सके। उन्होंने सभी कार्यों को परिणाम आधारित बनाने तथा उनके प्रभाव का मूल्यांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयास शामिल हैं।

इसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों का आकलन, पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन, क्षमता विकास तथा सामाजिक-आर्थिक अध्ययन को अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए गए। कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए स्थल चयन की प्रारंभिक तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चयनित क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं संभावित आजीविका गतिविधियों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, ताकि योजनाएं व्यवहारिक एवं टिकाऊ सिद्ध हो सकें।

बैठक में जिलाधिकारी ने वन विभाग लैंसडाउन को निर्देशित किया कि प्रस्तावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही प्रभागीय वनाधिकारी को राजस्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर उपयुक्त भूमि का चयन करने के निर्देश दिए गए, जिसमें सुगम पहुंच, व्यवहारिकता एवं स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रस्तावित कार्यों की समग्र एवं विस्तृत रूपरेखा तैयार कर प्रस्तुत की जाए।

इसमें पीरूल आधारित संयंत्र की स्थापना के साथ-साथ पर्यटन विकास, दुग्ध उत्पादन गतिविधियों तथा अन्य स्वरोजगार आधारित योजनाओं को भी शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं एवं ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें। कहा कि इस योजना के माध्यम से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक एवं बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।

बैठक में पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, परियोजना सलाहकार अपर्णा पाण्डे, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडौन रजत कपिल, परियोजना से दीपिका छेत्री आदि शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह

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