उत्तरकाशी : मंगसीर की बग्वाल का हुआ आगाज

उत्तरकाशी : मंगसीर की बग्वाल का हुआ आगाज


-क्षेत्रीय विधायक और फिल्म अभिनेत्री मधुरिमा ने किया शुभारंभ

-तिब्बती लुटेरों पर गढ़वाल सेना की विजय पताका है मंगसीर की बग्वाल

उत्तरकाशी, 23 नवम्बर (हि.स.)। जिला मुख्यालय सहित रवांई घाटी में मंगसीर की बग्वाल,देवलांग की धूम है। जिला मुख्यालय में क्षेत्रीय विधायक सुरेश चौहान ,फिल्म अभिनेत्री मधुरिमा तुली एवं पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल ने तीन दिवसीय बग्वाल का रामलीला मैदान पर फीता काट कर उद्घाटन किया।

देश दुनियाभर में कार्तिक महीने दीपावली मनाई जाती हैं। पहाड़ में ठीक एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल मनाते हैं। या यूं कहें कि पहाड़ों के उत्तरकाशी, रवांई घाटी-जौनपुर, जौनसार में भगवान श्रीराम भगवान का अयोध्या लौटने की खबर ठीक एक माह मिलती है। तभी तो सदियों से रवांई के गैरबनाल व ठकराल के मणपाकोटी , उत्तरकाशी के धनारी क्षेत्र में देवलांग का पर्व मनाने की अलग ही परम्परा है।

गौरतलब है कि एक ओर जहां देश दुनियाभर में कार्तिक महिने दीपावली मनाई जाती हैं वहीं पहाड़ में ठीक एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। या यूं कहें कि पहाड़ों के उत्तरकाशी, रवांई घाटी-जौनपुर, जौनसार में भगवान श्रीराम भगवान का अयोध्या लौटने की खबर ठीक एक माह मिलती है। तभी तो सदियों से रवांई के गैरबनाल व ठकराल के मणपाकोटी ,गंगा घाटी में मंगसीर में बग्वाल मननाने की परंपरा है।

अनघा माउंटेन एसोसिएशन उत्तरकाशी की ओर से मंगसीर बग्वाल की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के रामलीला मैदान में आज से तीन दिन तक मंगसीर बग्वाल की धूम रहेगी। मंगसीर बग्वाल में फिल्म अभिनेत्री मधुरिमा तुली भी बग्वाल कार्यक्रम में शामिल हुई, जिससे बग्वाल में और रौनक देखने को मिली। पहाड़ की इस खास दीपावली यानि बग्वाल को मनाने के लिए अन्य राज्यो में रह रहे प्रवासी भी बड़ी संख्या में गांव में पहुंचे हुए हैं।

उत्तरकाशी, चमोली में मंगसीर की बग्वाल को एक माह बाद मनाने के पीछे यह कारण है कि 1627-28 के बीच गढ़वाल के राजा महिपत शाह के शासन के दौरान तिब्बती लुटेरे गढ़वाल की सीमाओं के अंदर घुसकर लूटपात करते थे। तब माधो सिंह भण्डारी ने अपनी सेना इस दौराने चमोली के पैनखंडा और उत्तरकाशी के टकनौर क्षेत्राें में भेजी थी। गढ़वाल सेना विजय पताका फहराते हुए तिब्बत तक भारत के झंडे गाडे़ थे। इस खुशी में यह बग्वाल मनाएं जाने की परम्परा है।

हिन्दुस्थान समाचार/चिरंजीव सेमवाल

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