साहित्य और विद्या से ही लक्ष्य प्राप्ति संभव: आचार्य बालकृष्ण

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साहित्य और विद्या से ही लक्ष्य प्राप्ति संभव: आचार्य बालकृष्ण


देहरादून, 04 अप्रैल (हि.स.)। पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि एनबीटी का नाम लेते ही एक विशेष अनुभूति होती है और यह ज्ञान, संस्कृति तथा संस्कार का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और विद्या के माध्यम से जीवन में सफलता हासिल की जा सकती है।

उत्तराखंड के देहरादून के परेड ग्राउंड में आज से शुरू हुए पुस्तक उत्सव में आचार्य ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्राचीन ज्ञान को संरक्षित और संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सराहनीय है। आचार्य बालकृष्ण ने प्रामाणिक (ऑथेंटिक) साहित्य पढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत तपस्वियों, ऋषियों और वीरों की भूमि रही है, जिसकी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि पतंजलि भी साहित्य को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन कभी नुकसानदायक नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है। पढ़ने की प्रवृत्ति को समाज में बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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