सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक स्तर पर स्थापित : आचार्य बालकृष्ण

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सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक स्तर पर स्थापित : आचार्य बालकृष्ण


हरिद्वार, 15 जनवरी (हि.स.)। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने गुरुवार को एक अंतर—राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रहा है।

वह यह बातें पतंजलि विश्वविद्यालय एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के तत्वावधान में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कही।

उन्होंने 'सहस्त्र चंद्र दर्शन' में वर्णित दीर्घायु, स्वस्थ और ज्ञानपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि सनातन के मूल सिद्धांत खेती और किसान के जीवन में रचे-बसे हैं, जहां प्राकृतिक कृषि, पंचमहाभूतों के सम्मान और प्रकृति से सामंजस्य के माध्यम से सुखी एवं संतुलित जीवन का संदेश निहित है।

इस संगोष्ठी में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण पर जोर दिया गया। संगोष्ठी मे अमेरिका की ग्लोबल नॉलेज फाउंडेशन, भारतीय मानक ब्यूरो, देहरादून व यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न के बिजनेस, मैनेजमेंट और अकाउंटिंग विभाग की भी सहभागिता रही। पतंजलि विश्वविद्यालय के सभागार में संगोष्ठी 17 जनवरी तक चलेगी।

भूमंडलीकरण की अवधारणा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जब एक ‘वैश्विक गांव’ बन रहा है। तब सनातन का ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का सिद्धांत वैश्विक एकता, साझा उत्तरदायित्व और सामूहिक समाधान की भावना को सुदृढ़ करता है।

‘स्वास्थ्य सेवा में इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ पर उन्होंने कहा कि वियरेबल सेंसर, कनेक्टेड मेडिकल पंप और अस्पतालों के स्मार्ट उपकरण इंटरनेट व सॉफ्टवेयर के माध्यम से जुड़े रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य डेटा का संग्रह, साझा कर विश्लेषण संभव होता है।

मुख्य अतिथि एवं भारतीय मानक ब्यूरो के निदेशक सचिन चौधरी ने राष्ट्रीय मानकों, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमलकिशोर पंत ने टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य, एआई और भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व पर विचार साझा किए।

पतंजलि हर्बल रिसर्च की अनुसंधान प्रमुख डॉ.वेदप्रिया आर्या ने साक्ष्य-आधारित इतिहास, एग्रीटेक, मृदा परीक्षण तथा कृषि उद्यमिता को पतंजलि से जोड़ते हुए एआई-आधारित व्यावहारिक स्तर पर कार्य की व्याख्या की। अन्य विशेषज्ञों डॉ. प्रशांत कटियार, डॉ. कनक सोनी, प्रो. मयंक अग्रवाल, डॉ. सविता ने भी विचार रखे।

डॉ.देव शर्मा ने डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और एआई-सहायित स्मार्ट प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित, प्रभावी और उन्नत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता रेखांकित की। आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो.लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि आधुनिक एआई जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है, पर नैतिकता आवश्यक है। उन्होंने सिंक्रोना सिटी, नवाचार, स्टार्टअप्स की चर्चा करते हुए भारतीय ज्ञान और सनातन मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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