विश्व मंच पर आयुर्वेद की गूंज आचार्य बालकृष्ण को विश्व आयुर्वेद रत्न सम्मान
हरिद्वार, 01 अप्रैल (हि.स.)। आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण में निरंतर कार्य कर रहे आचार्य बालकृष्ण को एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। नेट ग्रीन फाउंडेशन की ओर से आयोजित अर्थ अवार्ड एंड हाई इंपेक्ट सस्टेनेबिलिटी डायलॉग-2026 के अंतर्गत उन्हें ‘विश्व आयुर्वेद रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया। यह समारोह यूनेस्को हाऊस में आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे। आचार्य बालकृष्ण ने जानकारी दी।
हालांकि आचार्य बालकृष्ण इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने इस सम्मान को आयुर्वेद की हजारों वर्षों पुरानी महान परंपरा को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस समृद्ध भारतीय परंपरा का है, जिसने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सिद्धांत को जीवन में उतारा और मानवता को समग्र स्वास्थ्य तथा संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम में मंजिंदर सिंह सिरसा व यूनेस्को की प्राकृतिक विज्ञान इकाई के प्रमुख डॉ. बेन्नो बोएर सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और नीति-निर्माता मौजूद रहे। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने आयुर्वेद और सतत विकास के बीच गहरे संबंध पर अपने विचार साझा किए।
नेट ग्रीन फाउंडेशन: सतत विकास का वैश्विक मंच
नेट ग्रीन फाउंडेशन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। संस्था का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रयासों को पहचान देना है, जो प्रकृति और मानव के बीच संतुलन स्थापित करने में योगदान दें। अर्थ अवार्ड इसी पहल का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है।
आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने का मिशन
आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि आयुर्वेद के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए उसे विश्व पटल पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने न केवल आयुर्वेदिक उत्पादों को घर-घर तक पहुंचाया, बल्कि शोध, शिक्षा और औषधीय पौधों के संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

