बाबासाहेब का सम्पूर्ण जीवन समानता, न्याय की स्थापना के लिए था समर्पित: प्रो. एमएम सेमवाल

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बाबासाहेब का सम्पूर्ण जीवन समानता, न्याय की स्थापना के लिए था समर्पित: प्रो. एमएम सेमवाल


देहरादून, 13 अप्रैल (हि.स.)। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आम्बेडकर की 135वीं जयंती पर डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केन्द्र व निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बाबासाहेब के जीवन, उनके संघर्ष, उनके योगदान और उनके शैक्षणिक, सामाजिक और संवैधानिक दृष्टिकोण पर प्राध्यापकों व छात्र-छात्राओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कार्यवाहक कुलपति जी प्रो. एनएस पंवार ने कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

कार्यक्रम का संयोजन प्रो. एम. एम. सेमवाल ने किया। प्रो. सेमवाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए डॉ. अम्बेडकर के जीवन दर्शन व उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का सम्पूर्ण जीवन समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए समर्पित था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने डॉ. अम्बेडकर के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार प्रकट किए। इन विद्वानों ने शिक्षा, समता, समानता एवं संविधान निर्माण में उनकी अप्रतिम भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला प्रो. एम. एस. पँवार ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह करोड़ों वंचितों के स्वप्नों और आकांक्षाओं का प्रतीक है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद ने डॉ अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे डॉक्टर आंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों की बात की। साथ ही साथ उन्होंने छात्र-छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम को प्रो. ओपी गुसाईं, प्रो. दीपक कुमार आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अम्बेडकर उत्कृष्टता केन्द्र के डॉ. आशीष बहुगुणा, डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. मुकेश सहाय, डॉ. शैलेन्द्र चमोला, डॉ. वीर सिंह आदि शिक्षक मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल

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