देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास, चार माह तक थमे मांगलिक कार्य

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देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास, चार माह तक थमे मांगलिक कार्य


हरिद्वार, 25 जुलाई (हि.स.)। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के साथ शनिवार से सनातन परंपरा का पवित्र चातुर्मास प्रारंभ हो गया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं। इसी के साथ विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्यों पर देवउठनी एकादशी तक विराम लग गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप जोशी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए इन चार माह में भगवान शिव की आराधना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का विशेष महत्व बढ़ जाता है। धर्माचार्यों का कहना है कि यह समय आत्मचिंतन, संयम, साधना और भक्ति का काल है।

श्रावण मास के आगमन के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में शिवमय माहौल शुरू हो जाएगा। कनखल स्थित प्राचीन दक्षेश्वर महादेव मंदिर, हर की पैड़ी स्थित बिल्केश्वर महादेव और अन्य शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। मान्यता है कि श्रावण में की गई शिव पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी कारण कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक का विशेष महत्व है।

देवशयनी एकादशी पर सुबह से ही हरिद्वार के गंगा तटों पर श्रद्धा का नजारा दिखा। हर की पैड़ी, कृष्णा नगर, कनखल, भीमगोड़ा सहित प्रमुख घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर दान-पुण्य किया और मंदिरों में दीपदान किया। दिनभर मंदिरों में भजन-कीर्तन, भागवत पाठ और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन हुआ।

संत समाज के अनुसार चातुर्मास में संत-महात्मा एक स्थान पर निवास कर सत्संग और साधना करते हैं। इस अवधि में श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन, जप-तप और सेवा कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ज्योतिष आचार्य पंडित प्रदीप जोशी के अनुसार शास्त्रों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी पर विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा और दान करने से सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मांगलिक कार्यों का पुनः शुभारंभ होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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