तिथि विवाद पर स्पष्टता: कब से शुरू होंगे नवरात्र, जानिए विशेषज्ञ की राय

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तिथि विवाद पर स्पष्टता: कब से शुरू होंगे नवरात्र, जानिए विशेषज्ञ की राय


चंपावत, 18 मार्च (हि.स.)। हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्र को अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है, लेकिन इस वर्ष 19 मार्च को सूर्योदय तक अमावस्या रहने के कारण श्रद्धालुओं के बीच पूजा प्रारंभ की सही तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस संदर्भ में घिंघारुकोट, चंपावत निवासी ज्योतिषाचार्य प्रकाश पांडेय ने धर्मग्रंथों और पुराणों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि “धर्मो रक्षति रक्षितः” अर्थात धर्म, नैतिकता और सदाचार की रक्षा करना ही सर्वोच्च कर्म है। उन्होंने बताया कि वर्षारम्भ और नवरात्र पूजन के नियम शास्त्रों में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं।

ज्योतिषाचार्य पांडेय ने श्री गणेश मार्तंड पंचांग सहित अन्य प्रामाणिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि संवत्सर प्रतिपदा-शुक्ल पक्ष के तिथियुग्म नियम के अनुसार, भले ही सूर्योदय तक अमावस्या हो, फिर भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही नवरात्र प्रारंभ के लिए उपयुक्त माना जाता है। धर्मसिंधु के अनुसार, प्रतिपदाक्षय की स्थिति में उदय तिथि ही पूजा का प्रमाणिक आधार होती है।

उन्होंने पिछले 40 वर्षों के पंचांगों का अध्ययन भी सामने रखा। उदाहरण स्वरूप, वर्ष 1995 में अमावस्या अल्पकालीन होने पर भी पूरा दिन अमावस्या माना गया। वर्ष 1988 और 1989 में प्रतिपदा क्षय की स्थिति में प्रतिपदा और द्वितीया को एक ही दिन स्वीकार किया गया। वर्ष 1998, 2007 और 2017 में भी समान परिस्थितियों के बावजूद अमावस्या पर नवरात्र प्रारंभ नहीं माना गया।

इसी ऐतिहासिक और शास्त्रीय आधार पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में सूर्योदय की तिथि को प्रमाणिक मानते हुए 20 मार्च को प्रतिपदा-द्वितीया से नवरात्र का शुभारंभ करना शास्त्रसम्मत है। उन्होंने सभी पुरोहितों और धार्मिक संगठनों से अपील की है कि वे इस निर्णय का पालन करें, ताकि श्रद्धालु बिना किसी भ्रम के नवरात्रि के व्रत और पूजा विधिपूर्वक आरंभ कर सकें। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सूर्योदय में जो तिथि होती है, वही पूरे दिन की मान्य तिथि मानी जाती है। इस निर्णय से नवरात्रि को लेकर बना भ्रम दूर होगा और श्रद्धालु शास्त्रसम्मत विधि से पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी

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