तप व त्याग की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन स्वामी चेतनानंद गिरि : रविन्द्र

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हरिद्वार, 14 जनवरी (हि.स.)। ब्रह्मलीन स्वामी चेतनानंद गिरि महाराज की पुण्यतिथि पर बुधवार को संत-महात्माओं व भक्तों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

संन्यास मार्ग स्थित श्री चेतनानंद गिरि आश्रम में आयोजित हुए पुण्यतिथि समारोह को अध्यक्षीय पद से सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने स्वामी चेतनानंद गिरि महाराज को ब्रह्मनिष्ठ संत बताते हुए कहाकि उनका सरल जीवन और उत्तम चरित्र संतों के लिए प्रेरणा से परिपूर्ण रहेगा। वे तप व त्याग की प्रतिमूर्ति थे। वे उदार तथा सनातन के रक्षक थे।

उन्होंने अपना सारा जीवन संतों की सेवा व सनातन संस्कृति के उत्थान में लगाया। उन्होंने आश्रम में गौ सेवा, ब्राह्मण सेवा व शिक्षा के परिकल्पों की शुरूआत की। उन्हीं के प्रेरणा से उनकी परम्परा में स्वामी रामांनद महाराज उसी परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

महामण्डलेश्वर स्वामी सोमश्वरानंद गिरि महाराज ने भी अपने दादा गुरु स्वामी चेतनानंद गिरि महाराज को सत परम्परा के सिद्धातों का पुरोधा बताते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

आश्रम के परमाध्यक्ष महंत रामानंद गिरि व स्वामी कृष्णानंद गिरि ने आए हुए अतिथियों को स्वागत किया। इस दौरान कई प्रातों से आए भक्तों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इससे पूर्व अखण्ड श्रीराम चरित मानस के पाठ का आयोजन हुआ। पाठ की समाप्ति पर हवन, गुरु पूजन, रूद्राभिषेक का आयोजन किया गया। तत्पश्चात विशाल भण्डारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैंकड़ों सत व भक्त मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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