जलवायु परिवर्तन से नैनीताल के बलिया नाला जलग्रहण क्षेत्र के जल स्रोत प्रभावि

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जलवायु परिवर्तन से नैनीताल के बलिया नाला जलग्रहण क्षेत्र के जल स्रोत प्रभावि


नैनीताल, 16 मार्च (हि.स.)। वैश्विक जलवायु परिवर्तन का हिमालयी क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे नदियों और पारंपरिक जल स्रोतों पर नकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल में प्रस्तुत एक शोध में यह तथ्य सामने आया है कि जनपद नैनीताल मुख्यालय के आधार बलिया नाला से निकलने वाली बलिया नदी के जलग्रहण क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण जल स्रोतों में कमी आ रही है।

सुभाष चंद्र बोस राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रपुर की भूगोल विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूनम साह गंगोला के निर्देशन में शोधार्थी वसीम अहमद ने “इंपैक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज ऑन वाटर रिसोर्सेस: ए केस स्टडी ऑफ बलिया कैचमेंट डिस्ट्रिक्ट नैनीताल” विषय पर अपनी पीएचडी की अंतिम मौखिक परीक्षा के दौरान बताया कि बलिया नदी तथा इसकी सहायक नदियों कुरिया गाड़ और नलेना गाड़ में जलस्तर घट रहा है।

क्षेत्र में पारंपरिक जल स्रोत धारे-नौले सूख रहे हैं और आर्द्रभूमियाँ, जिन्हें स्थानीय भाषा में सिमार और गजार कहा जाता है, सिकुड़ती जा रही हैं। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 19 प्रतिशत जल स्रोत सूख चुके हैं जबकि 24 प्रतिशत मौसमी होकर रह गये हैं।

शोध में यह भी सामने आया कि क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है, वर्षा का स्वरूप बदल रहा है और वर्षा के दिनों में कमी के साथ अतिवृष्टि की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इसके कारण कृषि, बागवानी और पशुपालन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है तथा स्थानीय लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो रही है। अपने शोध में वसीम अहमद ने सुझाव दिया है कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए समुदाय आधारित जल प्रबंधन अपनाना आवश्यक है।

इसके लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से जल स्रोतों का पुनर्जीवन तथा रिचार्ज क्षेत्रों का संरक्षण किया जाना चाहिए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली से आये बाह्य परीक्षक प्रो. प्रवीण कुमार पाठक ने इस अध्ययन को महत्वपूर्ण बताते हुए जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है।

इस अवसर पर प्रो. आरसी जोशी, डॉ. पूनम साह गंगोला, डॉ. मनीषा त्रिपाठी, डॉ. मोहन लाल, डॉ. पीसी चन्याल, डॉ. विनीता, डॉ. देवेंद्र, डॉ. दीपक सहित अन्य शोधार्थी उपस्थित रहे। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने वसीम अहमद को पीएचडी उपाधि प्राप्त होने पर शुभकामनाएं दीं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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