गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वार्षिकोत्सव प्रोत्साहन में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
हरिद्वार, 12 अप्रैल (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में आयोजित 123वें वार्षिकोत्सव प्रोत्साहन के दूसरे दिन एआई-ड्रिवन नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल फॉरेंसिक्सरू ट्रेंड्स, रिसर्च एंड एडवांसेज इन क्रिमिनल एविडेंस विषय पर अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र का शुभारम्भ वंदे मातरम एवं कुलगीत के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि हरिद्वार जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने कहा कि डिजिटल युग में अपराधों के स्वरूप और पैटर्न में तेजी से बदलाव आया है। इन चुनौतियों से निपटने में डिजिटल फॉरेंसिक और एआई टूल्स अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समय की आवश्यकता है, लेकिन युवाओं को इसकी अति-निर्भरता से भी सावधान रहना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि फोरेंसिक साइंस लैब, हैदराबाद के पूर्व निदेशक एवं विशेषज्ञ के.एम. वार्ष्णेय ने कहा कि साक्ष्य को सत्य में बदलना ही फोरेंसिक साइंस है। उन्होंने बताया कि नई न्याय संहिता में गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने से देश में विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है, जिससे युवाओं के लिए यह क्षेत्र एक बड़ा करियर विकल्प बनकर उभरा है।
समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि एआई आधारित डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों ने कई अनसुलझे मामलों को सुलझाने में मदद की है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में फोरेंसिक साइंस को अनिवार्य विषय बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में भेषज विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येन्द्र कुमार राजपूत ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, जबकि शोध एवं विकास निदेशक डॉ. सुहास ने विश्वविद्यालय में चल रहे शोध कार्यों की जानकारी दी। संचालन डॉ. कल्पना सागर ने किया।
इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के वैज्ञानिक डॉ. सत्य प्रकाश ने एप्लीकेशन ऑफ बार कोडिंग इन फोरेंसिक साइंस विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान देते हुए बताया कि डीएनए बारकोडिंग तकनीक से वास्तविक अपराधियों की सटीक पहचान संभव है। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस और जेनेटिक्स के समन्वय से जटिल मामलों को तेजी से सुलझाया जा सकता है।
संगोष्ठी में न्यूजीलैंड, यूएई और नेपाल सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में 21 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि तथा विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने सहभागिता की। यज्ञ का संयोजन डॉ. दीनदयाल एवं डॉ. वेदव्रत ने किया।
वैज्ञानिक सत्रों के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकगीत, गिद्दा, भांगड़ा, योग प्रदर्शन और लघु नाटिका ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा औषधीय पौधों का वृक्षारोपण भी किया गया।
संमारोह में योग विभाग एवं कन्या गुरुकुल की छात्राओं द्वारा जटिल योग आसनों की प्रस्तुति, स्वामी श्रद्धानन्द पर भाषण प्रतियोगिता, स्वामी दयानंद व स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर आधारित नाटिका व युवा कवियों द्वारा शानदार कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के विभिन्न राज्यों सहित करीब 350 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। समापन सत्र में डॉ. बी.के. संजय ने अपना संबोधन प्रस्तुत किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

