कल रात देखें पर्सीड उल्कापात की आसमानी आतिशबाजी

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कल रात देखें पर्सीड उल्कापात की आसमानी आतिशबाजी


नैनीताल, 11 अगस्त (हि.स.)। अगस्त में होने वाला पर्सीड उल्कापात वर्ष के सबसे लोकप्रिय और शानदार उल्कापातों में से एक है। इस वर्ष आगामी 12 और 13 अगस्त की रात इसके अधिकतम सक्रिय रहने की संभावना है। अमावस्या के कारण इस दौरान चांदनी नहीं होने से आसमान अपेक्षाकृत अंधेरा रहेगा। ऐसे में यदि मौसम साफ रहा तो मध्यरात्रि के बाद कुछ घंटों में प्रति घंटे 50 से 100 तक आसमान में चमकते हुए गिरती उल्काएँ दिखाई दे सकती हैं। इन्हें देखने के लिए किसी दूरबीन की आवश्यकता नहीं होगी।

एरीज विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि आम बोलचाल में जिसे ‘टूटता तारा’ या ‘शूटिंग स्टार’ कहा जाता है, उसका तारों से कोई संबंध नहीं होता। इसे हिंदी में उल्का कहा जाता है। धूमकेतु और क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा करते समय धूल तथा छोटे-छोटे कण अपनी कक्षा में छोड़ते जाते हैं। जब पृथ्वी ऐसे कणों के बादल से होकर गुजरती है तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश कर घर्षण के कारण गर्म होकर जलने लगते हैं और आकाश में चमकती हुई लकीर के रूप में दिखाई देते हैं। एक रात में बड़ी संख्या में उल्काएँ दिखाई देने और उनके आकाश के किसी एक क्षेत्र से आते हुए प्रतीत होने की घटना को उल्कापात कहा जाता है। पर्सीड उल्कापात लगभग जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक सक्रिय रहता है, जबकि इसकी सर्वाधिक गतिविधि अगस्त के मध्य में होती है।

इसका संबंध स्विफ्ट-टटल धूमकेतु से है। इस दौरान उल्काएँ पर्शियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं। डॉ. यादव के अनुसार पर्सीड उल्कापात देखने के लिए कृत्रिम रोशनी से दूर किसी खुले स्थान का चयन करना बेहतर रहेगा। अगस्त में मानसून के कारण बादल बाधा बन सकते हैं, लेकिन आसमान कुछ घंटों के लिए साफ होने पर इस खगोलीय घटना का आनंद लिया जा सकता है। इसके लिए केवल खुले और अंधेरे आकाश की ओर आराम से देखते रहना पर्याप्त है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी

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