उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की डॉ. डसीला को मिला यूकास्ट यंग वूमेन साइंटिस्ट अवार्ड

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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की डॉ. डसीला को मिला यूकास्ट यंग वूमेन साइंटिस्ट अवार्ड


हल्द्वानी , 27 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के लिए गौरव का विषय है कि विश्वविद्यालय के वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक डॉ. खष्टी डसीला को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान एवं अकादमिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित उकोस्ट यंग वोमेन साइंटिस्ट अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है।

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उकोस्ट की ओर से 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2026–27 के अवसर पर 25 एवं 26 अक्टूबर 2026 को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. डसीला का शोध मुख्य रूप से हिमालयी जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण तथा पादप-सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाओं पर केंद्रित है। विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण वृक्ष भोजपत्र (बैतूला यूटिलिस डी डॉन ) पर उनका शोध उल्लेखनीय है। उनके अनुसंधान में भोजपत्र की जड़ों से जुड़े लाभकारी जीवाणुओं एवं कवकीय एंडोफाइट्स की भूमिका, पौधों की वृद्धि, पर्यावरणीय तनाव के प्रति सहनशीलता और प्राकृतिक पुनरुत्पत्ति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।

उनका शोध हिमालयी पारिस्थितिकी की जटिलताओं को समझने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण, वानिकी और पर्यावरणीय जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को सामने लाता है। बदलती जलवायु और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच इस प्रकार के अनुसंधान का विशेष महत्व है।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध की पहचान

डॉ. खष्टी डसीला की शोध उपलब्धियों में अब तक 19 शोधपत्र, 6 समीक्षित पुस्तक अध्याय, 3 लोकप्रिय लेख तथा एक पॉलिसी ब्रीफ शामिल हैं। उनके शोधपत्र करंट साइंस एप्लाइड सॉइल इकोलॉजी जर्नल ऑफ़ माउंटेन साइंस साइंटिफिक रिपोर्ट्स करंट ओपिनियन इन एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी तथा प्लांट फिजियोलॉजी एंड बायोकेमिस्ट्री जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

उनका अनुसंधान मृदा सूक्ष्मजीव पारिस्थितिकी, मृदा एंजाइम गतिविधियों, औषधीय एवं कम उपयोग में आने वाले हिमालयी पौधों के जैव सक्रिय घटकों तथा पादप-सूक्ष्मजीव संबंधों जैसे विविध विषयों तक विस्तृत है। क्षेत्रीय सर्वेक्षणों एवं प्रयोगशाला आधारित अध्ययनों के माध्यम से वह हिमालयी प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक अध्ययन और उनके सतत संरक्षण की दिशा में योगदान दे रही हैं।

उच्च शैक्षणिक योग्यता एवं शोध अनुभव

डॉ. खष्टी डसीला ने माइक्रोबायोलॉजी में एम.एससी. तथा जैव-प्रौद्योगिकी में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता

Livevns.news Desk
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