अर्द्धकुंभ की तैयारियों और धर्म-अध्यात्म पर संतों ने किया मंथन
हरिद्वार, 07 नवंबर (हि.स.)। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज ने अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी से भेंट कर उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर दोनों संतों के बीच धर्म, अध्यात्म, सनातन संस्कृति और आगामी अर्द्धकुंभ की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
भेंट के दौरान वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण उत्सव है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का संदेश देता है। संत समाज का दायित्व है कि वह समाज में धर्म, संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित करने में संत समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आगामी अर्द्धकुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी संतों और अखाड़ों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने महाकाल मंदिर उज्जैन में श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज के साथ सुरक्षा में लगे कर्मियों द्वारा अभद्रता किए जाने पर नाराजगी जतायी तथा दोषी व्यक्ति के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार से कार्यवाही किए जाने की मांग की।
अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज का स्वागत करते हुए कहा कि संतों का आपसी संवाद और समन्वय सनातन धर्म की मजबूती का आधार है। अर्द्धकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, आस्था और आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव है। इसके सफल आयोजन के लिए संत समाज, अखाड़ों और मेला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद और संत समाज अर्द्धकुंभ को भव्य एवं दिव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए अपने स्तर से हरसंभव सहयोग करेंगे।
श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा कि हरिद्वार की पवित्र भूमि सदियों से धर्म और अध्यात्म का केंद्र रही है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक पर्व और कुंभ जैसे आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति से जोड़ते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से धर्म, सेवा, संस्कार और सामाजिक एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचता है।
दोनों संतों ने इस अवसर पर सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और समाज में आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

