साध्वी ऋतंभरा बोली, विपत्ति के समय ही होती है अपने पराए की पहचान

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साध्वी ऋतंभरा बोली, विपत्ति के समय ही होती है अपने पराए की पहचान


बीकानेर, 24 फ़रवरी (हि.स.)। सनातन धर्म रक्षा समिति के बैनर तले पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा और 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को साध्वी ऋतंभरा ने कहा, भक्ति के बिना भगवान को पाना नामुमकिन है। भक्ति दिखावा करने से नहीं मिलती बल्कि उसके लिए एकाग्रचित्त होकर भगवान में लीन होना पड़ता है। भगवान की भक्ति में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वालों को कभी भी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता।

साध्वी ने कहा कि छल कपट करने वाले लोगों के सामने तो अपने को खुश दिखाते हैं लेकिन वास्तव में वे हमेशा नाखुश ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा अच्छा सोचना चाहिए। विशेष कर गर्भवती महिला को तो अपने गर्भ काल के दौरान भगवान का ही स्मरण करते रहना चाहिए। ऐसा करने वाली महिला अभिमन्यु जैसे पुत्र को जन्म देती है। साध्वी ऋतंभरा ने कहा, अपने पराए की पहचान विपत्ति के समय ही होती है। विपत्ति में जो साथ खड़ा रहे वहीं अपना है। बाकी तो मौका परस्त होते है। उन्होंने गांधारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने पतिधर्म में अपनी आंखों पर ऐसी पट्टी बांध ली जिससे कि उसे सही गलत का भान ही नहीं रहा। वो सही को भी गलत मान रही थीं। भगवान खुद करते हैं अपने भक्त का ध्यान करते हैं। कथा की शुरुआत में जुगल किशोर बिहाणी, झंवरलाल टाक जशोदा ने सपत्नीक आरती करवाई। श्रीमद्भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज और शिवबाड़ी महंत विमर्शानंद महाराज का सान्निध्य रहा।

इस मौके पर सनातन धर्म रक्षा समिति के संस्थापक सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, अनिल सोनी (झूमर सा), किशोर सर, बाबूसिंह राजपुरोहित आदि ने सेवा दी। ध्रुव अवतार की सजीव झांकी सजाई गई कथा में जैसे ही ध्रुव अवतार का प्रसंग आया वैसे ही मयंक और चंचल मंच पर आए। दोनों ने ध्रुव अवतार की झांकी को श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया। बच्चों की प्रस्तुति देखकर पूरा पांडाल भाव विभोर हो गया। 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ में तीन दिनों में दी करीब 69 हजार आहुतियां सनातन धर्म रक्षा समिति की ओर से बैनर तले हो रहे 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ के तीन दिनों में करीब 69 हजार आहुतियां दी गई। यज्ञाचार्य पंडित सिद्धार्थ पुरोहित (बाला महाराज) ने बताया कि अब चार दिनों में शेष आहुतियां दी जाएगी। सात दिनों में विश्व शांति के लिए 1,67,500 आहुतियां दी जानी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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