सशक्त एवं वैज्ञानिक अनुसंधान से ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलती : पुलिस आयुक्त

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सशक्त एवं वैज्ञानिक अनुसंधान से ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलती : पुलिस आयुक्त


जोधपुर, 30 अपै्रल (हि.स.)। पुलिस आयुक्तालय जोधपुर द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के सहयोग से नवीन आपराधिक कानूनों एवं आधुनिक अनुसंधान तकनीकों पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन मारवाड़ इंटरनेशनल में किया जा रहा है। सेमिनार का उद्देश्य अनुसंधान अधिकारियों को नवीन विधिक प्रावधानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स एवं वैज्ञानिक जांच तकनीकों के संबंध में अद्यतन प्रशिक्षण प्रदान करना।

कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय एवं यातायात) शहीन सी द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय के साथ अपराधों की प्रकृति जटिल होती जा रही है, ऐसे में अनुसंधान अधिकारियों के लिए आधुनिक तकनीकों एवं डिजिटल टूल्स की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षण को व्यवहारिक रूप से उपयोग में लाने पर विशेष जोर दिया।

एसबीआई जोधपुर के डीजीएम प्रशासन संजय उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि बैंकिंग सेक्टर एवं पुलिस के बीच समन्वय आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, विशेषकर साइबर अपराधों की रोकथाम एवं वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए इसकी सराहना की।

पुलिस आयुक्त शरत कविराज ने अपने उद्बोधन में सेमिनार की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुसंधान अधिकारियों का प्रशिक्षित एवं अपडेट रहना आवश्यक है। उन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सशक्त एवं वैज्ञानिक अनुसंधान से ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलती है।

सोनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित फोटोग्राफी प्रशिक्षण सत्र में घटनास्थल के वैज्ञानिक डॉक्यूमेंटेशन, साक्ष्य की गुणवत्ता बनाए रखने एवं आधुनिक कैमरा तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि सही एंगल, लाइटिंग एवं क्रमबद्ध फोटोग्राफी अनुसंधान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। श्री जोराराम डीडीपी द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से व्याख्या की गई। उन्होंने बताया कि नए कानूनों के तहत अनुसंधान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं जवाबदेह बनाई गई है। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से कानूनों के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी।

सहायक पुलिस आयुक्त वृत पश्चिम छवि शर्मा द्वारा नेटग्रिड पर प्रशिक्षण देते हुए बताया गया कि विभिन्न डेटाबेस के एकीकरण के माध्यम से जांच कार्य को अधिक प्रभावी एवं सटीक बनाया जा सकता है। उन्होंने डेटा विश्लेषण एवं संदिग्धों की पहचान में इसकी भूमिका को समझाया।

एएसआई देवाराम द्वारा आईसीजेएस ,ऑनलाइन टूल्स, राजकोप ट्रेनिंग ऐप, नवीन प्रणाली, साक्ष्य लिंकिंग एवं ई-साक्ष्य प्रबंधन पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अनुसंधान प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के तरीकों को समझाया।

प्रदीप बोहरा द्वारा एमओबी एवं एफएसएल से संबंधित सत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि फॉरेंसिक साक्ष्य अपराधों की जांच में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों के संग्रहण एवं परीक्षण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

दो दिवसीय सेमिनार में आज पुलिस आयुक्तालय जोधपुर के जिला पूर्व एवं पश्चिम के प्रत्येक वृत से 50 फीसदी थानाधिकारी, शेष थानों के द्वितीय प्रभारी अधिकारी तथा 50 फीसदी अनुसंधान अधिकारी रिजर्व पुलिस लाइन से भी उपस्थित रहे। इस प्रकार 300 अनुसंधान अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

शुक्रवार को जिला पूर्व व जिला पश्चिम के प्रत्येक वृत से शेष रहे थानाधिकारी, द्वितीय प्रभारी अधिकारी व 50 फीसदी शेष रहे अनुसंधान अधिकारी तथा 50 फीसदी अनुसंधान अधिकारी रिजर्व पुलिस लाइन से भी सेमिनार में सम्मिलित होंगे।

सेमिनार के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीन कानूनों, तकनीकी संसाधनों एवं वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धतियों की गहन जानकारी प्रदान की गई, जिससे अपराध अनुसंधान को अधिक प्रभावी, सुदृढ़ एवं परिणाममुखी बनाने में सहायता मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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