सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा है पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक सावा

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सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा है पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक सावा


बीकानेर, 19 जनवरी (हि.स.)। अगले महीने दस फरवरी को होने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज के ओलम्पिक सावे के दौरान इस वर्ष नवयुगल चन्द्रशेखर उमा के नाम से दाम्पत्य सूत्र में बंधेंगे।

रमक झमक संस्था द्वारा सोमवार को बारहगुवाड़ स्थित कार्यालय में इसके पोस्टर का विमोचन किया गया। स दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए समाजसेवी राजेश चूरा ने कहा कि पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक सावा सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा है, जो कि सादगी और मितव्ययता की मिसाल है। आज के दौर में यह अत्यंत प्रासंगिक है। रमक झमक ने सावा संस्कृति को न केवल जीवंत रखा हे बल्कि विश्व पटल पर प्रचार प्रसार कर इसकी उपयोगिता बताई है।

पंडित अशोक ओझा ने कहा कि विद्वानों द्वारा शास्त्र सम्मत चर्चा के पश्चात यह मुहूर्त निर्धारित किया है। उन्होंने सामूहिक विवाह के दौरान रमक झमक द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं के लिए आभार जताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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