शेखावाटी साहित्य संगम में इतिहास, तकनीक और लोकसंस्कृति का संगम, 200 से अधिक प्रतिभागियों ने बिखेरे लोककला के रंग
सीकर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। इतिहास से प्रेरणा, आधुनिक तकनीक की चुनौतियों और लोकसंस्कृति की पहचान के संदेश के साथ शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन शनिवार को विभिन्न विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।
गुरु तेग बहादुर के बलिदान की वर्तमान प्रासंगिकता, विकसित भारत में युवा पीढ़ी की भूमिका, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सामाजिक माध्यमों के प्रभाव और शेखावाटी की ऐतिहासिक कला विरासत जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। वहीं, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को मंच दिया। रात्रिकालीन नाट्य प्रस्तुतियों में संत गुरु रविदास के जीवन और वीरांगना हीरा दे की शौर्यगाथा के माध्यम से समरसता, कर्तव्य और स्वाभिमान का संदेश दिया गया।
सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में केशव संस्कृति प्रन्यास एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगम में वैचारिक सत्रों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने प्रतिभागियों को इतिहास, वर्तमान और भविष्य के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया।
संगम के प्रथम सत्र ‘जेन-जी, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ में वर्ष 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में युवा शक्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के प्रभावों पर विमर्श किया गया। सत्र में कर्ण कटारिया वक्ता तथा अनिल जी संचालक के रूप में निर्धारित थे। चर्चा का प्रमुख विषय यह रहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में युवा अपनी क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में किस प्रकार कर सकते हैं।
‘लोकमंथन एवं लोकवस्तु’ सत्र में सुरेश कुमार नायक, सोनिया शर्मा और अतुल सैनी ने शेखावाटी की हवेलियों, भित्तिचित्रों और पारंपरिक स्थापत्य कला के संरक्षण पर विचार रखे। वक्ताओं ने चित्रकारी की प्राचीन तकनीकों, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय कला परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शेखावाटी की हवेलियों को क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास और कलात्मक समृद्धि की महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में रेखांकित किया। सत्र का संचालन डॉ. सुनिधि मिश्रा ने किया।
‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ विषय पर महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय भरतपुर के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हल्दीघाटी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि हौसलों से भी लड़े जाते हैं। उन्होंने नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प और दूरगामी रणनीति के महत्व पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन डॉ. हेमंत कुमार ने किया।
‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ विषय पर अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच और दृष्टिकोण को प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसके लिए पढ़ाई, निरंतर मेहनत और समर्पण आवश्यक हैं।
फिल्म लेखक सूर्यपाल ने भी युवाओं से आभासी दुनिया के आकर्षण के बीच अपने वास्तविक लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। सत्र का संचालन अभिमन्यु सिंह राठौड़ ने किया।
‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी और वर्तमान प्रासंगिकता’ विषय पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. डॉ. करमजीत सिंह मुख्य वक्ता रहे। सत्र में गुरु तेग बहादुर के जीवन, बलिदान और शिक्षाओं के समकालीन महत्व पर चर्चा हुई। उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से साहस, सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता पर विचार किया गया। सत्र का संचालन डॉ. बरखा ने किया।
संगम के सांस्कृतिक पक्ष में लोककला प्रतियोगिताओं ने विशेष आकर्षण पैदा किया। एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की लोकपरंपराओं, पारंपरिक पहनावे और सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली। लोकनृत्य की प्रस्तुतियों को दर्शकों की सराहना मिली।
रात्रिकालीन कार्यक्रम में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। स्वामी रामानंद से भेंट और ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की लोकप्रचलित कथा के माध्यम से श्रम की गरिमा, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया।
दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक में अर्जुन देव, संदीप कुमार शर्मा, भारत भारद्वाज, तुषार शर्मा और योगिता वेदी सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया। प्रस्तुति ने सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
नाट्य दल की दूसरी प्रस्तुति ‘वीरांगना हीरा दे’ रही। जालोर की लोकप्रचलित शौर्यगाथा पर आधारित इस नाटक में कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान के भावों को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
डॉ. राकेश कुमार जैन और दीपक भारद्वाज द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन दीपक भारद्वाज ने किया। दोनों प्रस्तुतियों ने साहित्य संगम के सांस्कृतिक आयोजन को ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों से जोड़ा।
संगम परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास, भारतीय संस्कृति और समकालीन विषयों से जुड़ी पुस्तकें उपलब्ध रहीं। विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों और अन्य आगंतुकों ने पुस्तकों का अवलोकन किया तथा अपनी रुचि के अनुसार खरीदारी की। वैचारिक चर्चाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पुस्तक मेले ने पाठकों को विविध विषयों के साहित्य से जुड़ने का अवसर दिया।
शेखावाटी साहित्य संगम के तीसरे दिन रविवार, 11 अक्टूबर को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ का व्याख्यान प्रस्तावित है। इसके अलावा स्प्रिंग बोर्ड से जुड़े इतिहास वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ऐतिहासिक वीरों की पृष्ठभूमि पर विशेष सत्र को संबोधित करेंगे। इन सत्रों में राजस्थान के इतिहास और वीर परंपरा से जुड़े प्रसंगों पर चर्चा होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

